उत्तराखण्ड के वन मंत्री हरक सिंह रावत ने वन विभाग के अधिकारियों पर जमकर भड़ास निकाली है. उन्होंने वन विभाग के अफसरों को प्रदेश के विकास की राह में रोड़ा बताया है. हरक यहीं नहीं रुके उन्होंने यह भी कहा कि वन विभाग के अफसर मीटिंग में तैयारी के साथ नहीं आते. लेकिन, वन विभाग के अफसरों को लेकर सबसे तल्ख बयान तो हरक सिंह ने ये दिया कि वन विभाग के अफसर उत्तराखण्ड विरोधी हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे अफसरों को वो किसी भी कीमत पर नहीं बख्शेंगे.
मामला गढ़वाल को कुमायूं से जोड़ने वाली कंडी रोड से जुड़ा हुआ है जिसके तहत लालढांग से लेकर चिल्लरखाल तक सड़क का डामरीकरण किया जाना है. इसके लिए लोक निर्माण विभाग ने पिछले दिनों लगभग दस करोड़ की धनराशि जारी की थी. टाइगर रिजर्व के भीतर बनी ग्यारह किलोमीटर लम्बी इस कच्ची सड़क का डामरीकरण किया जाना है. इसके लिए टेण्डर हो चुके हैं और जल्द ही निर्माण कार्य शुरु होना है.
अब हरक सिंह रावत को वन विभाग के अफसरों पर गुस्सा इसलिए आया क्योंकि वन विभाग ने शासन को चिट्ठी लिखकर ये जानकारी दी कि सड़क के डामरीकरण से पहले भारत सरकार की अनुमति लेना जरूरी है. वन विभाग की इस चिट्ठी से हरक सिंह आग बबूला हो गए हैं. उन्होंने कहा कि लालढांग से चिल्लरखाल के बीच की सड़क के डामरीकरण किए जाने को लेकर कई बार बैठकें की गईं लेकिन, तब वन विभाग के अफसरों ने मीटिंग में कहा था कि इसके निर्माण में किसी की अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि 1970 के दशक में ये सड़क पक्की थी.
प्रमुख वन संरक्षक ने शासन को लिखा है कि मीटिंग में जिस सड़क के डामरीकरण की बात उठी थी वो लालढांग-चिल्लरखाल वन मोटरमार्ग नहीं बल्कि हरिद्वार-कोटद्वार वन मोटरमार्ग है. ऐसे में लालढांग से चिल्लरखाल के बीच सड़क का डामरीकरण कैसे किया जा सकता है.
सीधी भाषा में कहें तो वन विभाग का शासन को पत्र उसके ऊपर लगाए गए आरोप का जवाब है कि मीटिंग में बात किसी और सड़क की हुई और मरम्मत किसी और सड़क की करने की तैयारी हो गई.


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