देहरादून। वर्ष 2017 अब विदाई की ओर है। लोग नए साल के स्वागत करने की
प्रतीक्षा में हैं। गुजरा साल अब इतिहास बन जाएगा। इस साल ऊधमसिंह नगर में
एक नहीं कई बड़े घोटाले खुले। हालांकि जीरो टारलेंस का दावा करने वाली सरकार
ने इन मामलों की जांच तो कराई, लेकिन अभी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं
हो सकी। सिर्फ एनएच 74 में हुए करोड़ों के घोटाले में दो पीसीएस अफसरों समेत
दस लोगों को गिरफ्तार किया गया है। टीडीसी घोटाले में सिर्फ एफआईआर हुई
है, लेकिन आरोपी अभी बाहर हैं। इसी तरह खाद्यान्न घोटाले में जांच हुई, मगर
घोटाला सामने आने के बावजूद आज तक एफआईआर नहीं हुई। साल खत्म होता उससे
पहले सिडकुल घोटाला भी सामने आ गया है। इस मामले में भी जांच के आदेश भर ही
हुए हैं।
एक जनवरी 2017 का स्वागत लोगों ने खुशी खुशी किया था,
मगर तब किसी ने यह नहीं सोचा था कि यह साल घोटालों पर पड़े पर्दों का राज
खोल देगा। साल की शुरूवात में ही तत्कालीन आयुक्त ने एनएच 74 में चल रहे
बड़े घोटाले का पर्दाफाश करने के लिए जांच शुरू की। जांच हुई तो घोटाले की
परतें खुलती चली गई। प्रदेश में चुनाव आचार संहिता लगी हुई थी, जिस कारण
आयुक्त की जांच को प्रभावित नहीं किया जा सका। सरकार के गठन से पहले ही 170
करोड़ के एनएच घोटाले में एफआईआर दर्ज करा दी गई। हालांकि यह घपला 270 करोड़
तक सामने आ चुका था। एफआईआर में आरोपियों के साथ तत्कालीन अधिकारियों ने
रियायत बरती। आरोपी अफसरों और उनके अधीनस्थों को नामजद करने के बजाय उनके
पद नाम पर एफआईआर दर्ज कराई गई। उसके बाद प्रदेश में त्रिवेंद्र सिंह रावत
की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री ने छह पीसीएस अफसरों को निलंबित कर दिया।
मामले की सीबीआई जांच कराने का ऐलान करने के बाद सरकार केंद्रीय मंत्री
नितिन गडकरी के हस्तक्षेप के बाद बैकफुट पर आ गई। तमाम फजीहत के बाद एसआईटी
ने ही जांच शुरू की। एसआईटी ने अब तक की विवेचना में दो पीसीएस अफसरों
समेत दस लोगों को गिरफ्तार किया है। सभी जेल में हैं। हालांकि इतने बड़े
घोटाले में दर्जनों की संख्या में अधिकारी, कर्मचारी, किसान व बिचौलिए
शामिल थे, लेकिन महीनों से चल रही पुलिस की कार्रवाई को नाकाफी कहा जा सकता
है। विपक्ष चीखता रहा कि बड़ी मछलियों को बचाया जा रहा है, मगर उनकी आवाज
को दबा दिया गया।
घोटालों की इसी कड़ी में टीडीसी के घोटाले का
राजफाश हुआ। करीब 16 करोड़ के इस घोटाले में टीडीसी के तत्कालीन प्रबंध
निदेशक समेत नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। इसकी जांच के लिए भी
एसआईटी को सौंपी गई है। टीडीसी घोटाले की जांच भी कछुआ चाल से चल रही है।
इसमें आरोपियों ने गिरफ्तारी पर स्टे ले रखा है, मगर एसआईटी ने स्टे खारिज
कराने के लिए पैरवी तक नहीं की। जबकि एनएच 74 में जब निलंबित पीसीएस अफसर
डीपी सिंह ने गिरफ्तारी पर स्टे लिया था तो उसे खारिज करा दिया गया था। इस
साल में सैकड़ों करोड़ का खाद्यान्न घोटाला प्रकाश में आया। इसकी जांच के लिए
एसआईटी का गठन हुआ। एसआईटी ने जांच रिपोर्ट सरकार को दे दी। राज्य पोषित
योजनाओं के नाम पर बड़ा खेल खेला गया था। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि
दो साल में छह सौ करोड़ के सरकारी धन का अपव्यय किया गया। रुद्रपुर से
ऋषिकेश थ्रीव्हीलर से राशन पहुंचा दिया गया। इस मामले की विस्तृत जांच
कराने की सिफारिश की गई थी। हालांकि इस मामले में भी करोड़ों का घपला खुलने
पर एफआईआर दर्ज करानी चाहिए थी, लेकिन जीरो टारलेंस का दावा करने वाली
सरकार ने अभी विस्तृत जांच तक नहीं कराई। सैकड़ों करोड़ का गोल माल करने वाले
अफसर खुले में घूम रहे हैं। साल के अंतिम महीने में सिडकुल घोटाला भी
सामने आ गया। इसमें मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दे दिए हैं। यह भी कहा है
कि यदि जरूरत पड़ी तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। फिलहाल करोड़ों के इस घोटाले
की जांच भी शुरू नहीं हो सकी है।

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