देहरादून। मिर्गी रोग के शर्तिया इलाज का दावा करके रोगियों को नशीली दवाएं बेचने तथा खिलाने वाले नीरज क्लीनिक चलाने वाले चर्चित डाॅ. आरके गुप्ता और उसे पुलिस हिरासत छुड़ाने का प्रयास करने वाले 14 अन्य को बुधवार को सीजेएम ने सजा सुनाई। आरोपियों को अलग-अलग धाराओं में 6 माह से 5 साल व जुर्माने सजा सुनाई गई है। सजा पाने वालों में नगर पालिका ऋषिकेश के चेयरमैन से लेकर सभासद तक शामिल हैं। गुप्ता का क्लीनिक ऋषिकेश में था। 
आयुर्वेदिक दवाइयों के नाम पर मिर्गी रोगियों को नशीली दवाइयां बेचने के आरोप में तीन अगस्त 2004 में ऋषिकेश स्थित नीरज क्लीनिक पर राज्य ड्रग कंट्रोलर और प्रशासनिक अपफसरों ने छापेमारी की थी। मौके पर छानबीन में पाया गया कि एलोपैथिक दवाइयों में प्रतिबंधित साइकोथैरेपिक दवाइयां फिम्सोबार, इपिलाॅन, क्लोरोडाई और फिनोबारबिटाॅन आदि का मिश्रण बेचा जा रहा था। जिसके बाद पुलिस ने डा. आरके गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। डा. गुप्ता को पुलिस हिरासत से छुड़ाने के लिए भीड़ ने पुलिस पर हमला किया। पुलिस ने हमलावरों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 147, 323, 504, 506, 353, 332, 224, 427, 420 व एनडीपीएस की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया। इस मामला लगाभग 11 साल बाद फैसला आया। कोर्ट ने इस मामले में 15 लोगों को दोषी पाया। जिन्हें अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई। दोषियों में नीरज क्लीनिक चलाने वाले डाॅ. आरके गुप्ता, पूर्व सभासद प्यारे लाल, राहुल शर्मा, श्रीमती कविता शाह, कृष्ण कुमार, व्यापारी यशपाल सिंह पंवार, पत्राकार अशोक अश्क, व्यापारी नेता जयदत्त शर्मा व राज कुमार अग्रवाल, बसपा नेता रवि कुमार जैन, ऋषिकेश नगर पालिका के चेयरमैन दीप शर्मा, पूर्व चेयरमैन स्नेहलता शर्मा, पूर्व दर्जाधारी अनीता वशिष्ठ, दीवान सिंह रावत व अरविन्द शाह शामिल है। ऋषिकेश के तत्कालीन थाना प्रभारी जगदीश सिंह असवाल ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। 

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