देहरादून। एनएच 74 पर टोल बैरियर शुरू होने के बाद से अधूरे रह गई सड़क को पूरा करने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है, जिस कारण एनएच 74 पर टोल चुकाने के बाद भी लोगों को बेहतर सड़क की सुविधा नहीं मिल पाई है। अफसर सिर्फ बैठकें ही करते रहे, लेकिन उनके निर्देशों को हवा में उड़ा दिया गया।
गौरतलब है कि एनएच 74 पर सितारगंज से सुल्तानपुर पट्टी तक के चौड़ीकरण का जिम्मा गल्फार कंपनी को दिया गया था। सुल्तानपुर पट्टी से जसपुर तक चौड़ीकरण का कार्य दूसरी कंपनी को दिया गया था। यानि एनएच 74 के चौड़ीकरण के कार्य को दो हिस्सों में बांटा गया था। सितारगंज से सुल्तानपुर पट्टी तक चौड़ीकरण का अभी काफी काम बाकी है, लेकिन किच्छा रोड पर टोल प्लाजा शुरू करा दिया गया। हालांकि टोल प्लाजा शुरू करने का विरोध भी हुआ था, मगर उसे नजर अंदाज कर दिया गया। टोल प्लाजा शुरू होने के बाद कार्यदायी संस्था ने सड़क चौड़ीकरण का काम लगभग बंद कर दिया। अभी गदरपुर में बाईपास का कार्य पूरा नहीं हुआ है। गदरपुर के लोगों का शिष्टमंडल तो बाईपास का काम पूरा कराने की मांग को लेकर कलक्टर तक से मिल चुका है। लोगों का कहना है कि गदरपुर में जाम की स्थिति रहती है, इसलिए बाईपास का कार्य तत्काल पूरा कराया जाए। 
वहीं रेलवे स्टेशन जाने के लिए सर्विस रोड आज तक नहीं बनाई गई, जबकि रेलवे ओवरब्रिज शुरू हुए महीनों बीत चुके हैं। यही नहीं किच्छा रोड पर काफी काम बाकी है। किच्छा और सितारगंज के बीच भी सड़क चौड़ीकरण का काफी कार्य बाकी रह गया है। टोल प्लाजा शुरू हुए भी कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन अधूरे पड़े कार्यों को पूरा करने में आ रही दिक्कतों का दूर नहीं किया जा रहा है। सवाल यह है कि सालों से एनएच विस्तार में आ रही बाधाओं को दूर क्यों नहीं किया जा रहा है? यही नहीं जब काशीपुर रोड पर रेलवे ओबर ब्रिज का निर्माण शुरू किया गया तो उसके दोनों ओर सर्विस रोड बनाने के लिए अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया गया? हाल में ही प्रशासन ने रुद्रपुर में एनएच 74 के विस्तारीकरण की जद में आ रहे कुछ भवनों को ध्वस्त किया गया। 
अभी हाल में टोल प्लाजा पर वसूली बंद करने को लेकर नगर निगम की मेयर सोनी कोली ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। इस पत्र को कार्रवाई के लिए एनएचएआई को भी भेजा गया, लेकिन न तो टोल वसूली रुकी और न ही एनएच 74 का चौड़ीकरण पूरा हुआ। यहां बता दें कि सुल्तानपुर पट्टी से लेकर जसपुर तक के चौड़ीकरण का कार्य तो अभी धरातल पर ही नहीं आया है जबकि यहां अधिग्रहीत की गई जमीनों का मुआवजा बंटे लंबा समय बीत चुका है। गौरतलब है कि एनएच 74 में जमीनों के अधिग्रहण में बड़ा खेल सामने आ चुका है। जमीनों का बैकडेट में भू उपयोग तब्दील कराकर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा चुका है। इस घोटाले की जांच अभी लंबित है। सवाल यह है कि एनएच 74 पर टोल देने के बाद भी लोगों को पूरी सुविधा क्यों नहीं मिल पा रही है।

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