भारत-नेपाल बॉर्डर की महाकाली नदी में प्रस्तावित पंचेश्वर बांध निर्माण को लेकर भले ही सरकार ने तारीख तय न की हो लेकिन डूब क्षेत्र में रह रहे ग्रामीणों को बैंकों ने किसी भी तरह का ऋण देना बंद कर दिया है. इसके चलते डूब क्षेत्र में आ रहे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.
प्रस्तावित पंचेश्वर बांध डूब क्षेत्र में तीन ज़िले आ रहे हैं. इनमें पिथौरागढ़ के 88 गांव, चम्पावत के 24 गांव और अल्मोड़ा के 21 गांव डूब क्षेत्र में आ रहे हैं. लगभग 32 हज़ार ग्रामीण इससे प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं.
इस बांध परियोजना को लेकर प्रशासन ने चम्पावत, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा में डूब क्षेत्रों में आ रहे ग्रामीणों के साथ जन सुनवाई बैठक कर ली है लेकिन सही विस्थापन नीति की मांग कर रहे डूब क्षेत्र के ग्रामीणों की मुश्किलें बैंकों ने बढ़ा दी हैं.
डूब क्षेत्र में आ रहे ग्रामीणों का कहना है पंचेश्वर बांध के निर्माण की शुरुआत कब होगी यह अभी तय नहीं है लेकिन बैंको ने डूब क्षेत्र में आ रहे ग्रामीणों को कृषि ऋण सहित किसी भी तरह का ऋण देने से इनकार कर दिया है. इस वजह से पहले से अपने भविष्य को आशंकित ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.
बैंक अधिकारी इस मामले में सीधे कुछ कहने से बच रहे हैं. चंपावत के डीएम डॉक्टर अहमद इक़बाल का कहना है प्रशासन ने बैंको को डूब क्षेत्र में आ रहे ग्रामीणों को किसी भी तरह का ऋण देने का कोई निर्देश नहीं दिया है.
पंचेश्वर डूब क्षेत्र में पहले से ही बुनियादी सुविधा न होने के चलते जहां पहले से ही बड़े स्तर पर पलायन हुआ है.
वहीं अब ऐसे में जो ग्रामीण डूब क्षेत्र में रहकर अपनी ज़मीन में खेती कर कर दो वक़्त की रोटी जुटाने का काम कर रहे हैं. बैंकों का यह रवैया उन्हें आर्थिक मानसिक तौर पर तोड़ने का काम कर रहा है.


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