उत्तराखंड कैबिनेट ने ऋषिकेश को नगर निगम बनाने की मंजूरी देने के बाद शुक्रवार को ऋषिकेश को नगर निगम निगम बनाने की अधिसूचना जारी कर दी गई. नगर निगम बनाने की अधिसूचना जारी होने के बाद ऋषिकेश नगर पालिका बोर्ड भंग हो गई है.

तीर्थनगरी ऋषिकेश सदियों से आस्था के केन्द्र होने के कारण विश्व मानचित्र पर अपनी एक विशिष्ठ पहचान रखता आया है. अंग्रेजों ने तीर्थनगरी का महत्व को समझते हुए साल 1938 में ऋषिकेश को टाउन एरिया घोषित किया था. आजादी के बाद वर्ष 1952 में ऋषिकेश को नगर पालिका का दर्जा दिया गया.

नगर पालिका क्षेत्र ऋषिकेश में सीमा विस्तार से पूर्व में मौजूद 20 वार्डों में 73 हजार की जंनसंख्या थी. राज्य सरकार द्वारा हाल ही में शहरी विकास निदेशालय द्वारा सीमा विस्तार के लिए ग्राम पंचायत ऋषिकेश और वीरपुरखुर्द को इसमें शामिल किया गया है. जिसके बाद नगर पालिका क्षेत्र की जंनसंख्या 1,21,450 हो चुकी है.

सीमा विस्तार के बाद अब राज्य मंत्री परिषद ने ऋषिकेश नगरपालिका का दर्जा बढ़ा नगर निगम की बनाने की मंजूरी दी है. ऋषिकेश पालिका को नगर निगम बनाने की मंजूरी प्रदान कर दी गई है, जोकि विकास की दृष्टि से भले ही निगम का गठन जनता के लिए खुशखबरी है. मगर आने वाले वक्त में कई चुनौतियों का सामना सरकार, नगर निगम और जन प्रतिनिधियों को करना पड़ेगा.
ऋषिकेश नगर पालिका के निगम बनने से जहां पालिका के अब तक के 20 वार्डों की संख्या बढ़कर 40 हो जाएगी. नगर निगम में सभासदों को दर्जा बढ़कर पार्षद हो जाएगा, लेकिन वहीं अबतक 3500 की जनसंख्या पर जहां सभासद होता था. वहीं निगम में वार्ड बढ़ने से अब मात्र 3000 की जनसंख्या पर पार्षद होगा. नगरपालिका के निवर्तमान अघ्यक्ष दीप शर्मा का कहना है कि नगर निगम बनने से केन्द्र सरकार के बजट में वृद्धि होगी. जिसका लाभ जनता को भी मिलेगा.

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