ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश में मकर सक्रान्ति के पर्व पर श्रद्धालुओं ने कड़ाके की ठंड के बीच सुबह सुबह गंगा नदी में डुबकी लगाई। सुबह 4 बजे से ही तीर्थनगरी के त्रिवेणी घाट में दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं का गंगा स्नान के लिए तांता लगा हुआ है। मकर सक्रांति को भगवान सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं और धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते है, ऐसे में पवित्र नदी गंगा में स्नान का बड़ा महत्व है। ऋषिकेश में भी सुबह से ही भारी ठंड के बावजूद श्रद्धालु 4 बजे प्रात से ही स्नान कर रहे हैं। दिन शुरू होते ही श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हो रही है। श्रद्धालु स्नान के बाद पूर्जा अर्चना कर तिल, गुड़ और चावल का दान कर पुण्य कमा रहे हैं। ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट में गंगा सभा द्वारा श्रद्वालुओं को ठंड से बचाने के लिए कई जगहों पर अलाव की व्यवस्था भी की गई है।
मकर संक्रान्ति पर गंगा स्नान का बड़ा महत्व होता है। तीर्थनगरी ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट में उत्तराखण्ड़ की सुप्रसिद्ध सिद्धपीठ मां सुरकण्ड़ा देवी की देव डोली ने बहम्रमूर्त 4 बजे गंगा स्नान कर पुण्य अर्जित किया। स्नान के बाद मां सुरकण्ड़ा ने भक्तों को आर्शीवाद देने के साथ ही गढ़वाली जागर में नृत्य कर त्रिवेणी घाट का पूरा माहौल भक्तिमय कर दिया। मां की डोली के साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भी खूब जमकर नृत्य किया।
बता दें कि टिहरी के थौलधार ब्लाक के मंजोली गांव से गंगा स्नान के लिए आई मां सुरकण्ड़ा का गढ़वाल के इतिहास में 10वीं सदी पुराना बताया जाता है। मां सुरकण्ड़ा का सीधा सम्बन्ध कनखल हरिद्धार से है। मां सुरकण्डा की डोली के प्रबन्धक हुकुम सिंह जरधारी ने बताया कि मां ऋषिकेश में गंगा स्नान से बहुत खुश होती हैं, खुश होकर मां सुरकण्ड़ा की डोली ने भक्तों के साथ जमकर नृत्य किया, स्नान के बाद मां की डोली अपने धाम को वापस रवाना हो जाएंगी।

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