मातृ शक्ति ही बदल सकती है देश की दिशा और दशाः स्वामी चिदानन्द
ऋषिकेश, बीएचबीसी न्यूज। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज से विभिन्न प्रांतों से आयी महिला आयोग की अध्यक्षों एवं सदस्यों ने मुलाकात की। स्वामी ने आजादी के बाद महिलाओं की दिशा और दशा पर चिंतन करते हुये सभी से चर्चा की और उनका मार्गदर्शन भी किया।
 आईएएस, आलोक रावत, उत्तराखण्ड महिला आयोग की अध्यक्ष सरोजनी कैंत्युरा , झारखण्ड महिला आयोग की अध्यक्ष कल्याणी शरण, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोगहर्षिता पाण्डेय, अध्यक्ष कर्नाटक राज्य महिला आयोग नागा लक्ष्मी बाई साथ ही हरियाणा, दिल्ली, देहरादून, वेस्ट बंगाल एवं विभिन्न राज्यों के महिला आयोग की अध्यक्ष एवं सदस्यों ने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, ग्लोबल इण्टरफेथ वााश एलायंस के संस्थापक एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज से मुलाकात की एवं महिला सशक्तीकरण, महिलाआंे के अधिकारों का प्रतिनिधित्व, महिलाओं के स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, आफिस एवं विद्यालयों मंे
महिलाओं एवं छात्राओं के लिये अलग से शौचालय की व्यवस्था, स्वच्छता पैड (सेनेटरी नैपकिन) एवं महिलाओं से सम्बधित विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज एवं जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती ने विभिन्न राज्यों से आयी महिला आयोग की अध्यक्षों एवं सदस्यों से जीवा एवं गंगा एक्शन परिवार द्वारा चलाये जा रहे परियोजनाओं (प्रोजेक्ट) के विषय में जानकारी दी।
साध्वी  ने जीवा द्वारा महिलाओं की स्वच्छता एवं रोजगार के लिये शुरू किये ईको फ्रेंडली ’स्वच्छता पैड निर्माण’ के विषय में जानकारी दी और कहा कि यह पर्यावरण एवं स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से पूर्ण सुरक्षित तथा 100 प्रतिशत प्राकृतिक रूप से नष्ट होने वाले बायोडिग्रेडबल नैपकिन बनाने की तकनीक है जो परमार्थ निकेतन द्वारा बिल्कुल निःशुल्क रूप से प्रदान की  जाती है। इस परियोजना को उत्तराखण्ड राज्य में लागू किया जा रहा है ताकि महिलाओं एवं बच्चियों को स्थानीय स्तर पर सुरक्षित पैड प्राप्त हो सके तथा उन्हे रोजगार भी उपलब्ध किया जा सके। साध्वी जी ने कहा कि आप सब के सहयोग से जल्दी ही इसे देश के विभिन्न राज्यों मंे लागू किया जा सकता है और स्वच्छता पैड निर्माण का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा सकता है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’महिलायें ही देश की दिशा भी बदल सकती है और दशा भी बदल सकती है। मातृ शक्ति ही मात्र शक्ति है जो केवल भारत ही नहीं पूरे विश्व को एक नई दिशा दें सकती है। वैसे भी महिला का जो सम्मान है भारतीय संस्कृति में ’यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’  वह सम्मान हम सब को बरकरार रखा जाना चाहिये माँ, बहन, बेटी, पत्नी हर दृष्टि से हर दृष्टि से यदि देखे नारी का महत्वपूर्ण योगदान है। एक महिला अनेक भूमिकायें निभाती है। अब समय आ गया है भूमि काय जल  काय पर्यावरण का संरक्षण भी मातृ शक्ति के द्वारा ही हो सकता है। स्वामी जी ने कहा कि भविष्य में आने वाली जल की, पर्यावरण की, प्रदूषण की समस्याओं का मातृ शक्ति ही है समाधान। अपने-अपने घरों से करे इसकी शुरूआत। उन्होने कहा कि बेटियों की सुरक्षा समाज की जिम्मेदारी है। हमें शौचालय एवं फलदार पौधों का रोपण पहले छात्राओं के विद्यालय में करना होगा ताकि बेटियां स्वस्थ एवं सुरक्षित रह सके।’
स्वामी जी एवं साध्वी के साथ सभी मातृ शक्तियों ने विश्व में स्वच्छ जल के संरक्षण हेतु वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी में सहभाग किया तत्पश्चात सभी ने माँ गंगा की दिव्य आरती में सहभाग किया। स्वामी महाराज ने सभी को पर्यावरण एवं जल संरक्षण का संकल्प कराया।
श्रीमती कल्याणी शरण, ने साध्वी के साथ हुई स्वच्छता पैड (सेनेटरी नैपकिन) की चर्चा को अत्यंत प्रभावी बताते हुये इस पर अपने राज्य में कार्य करने हेतु उत्सुकता जतायी। स्वामी महाराज ने शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा आलोक रावत और सभी मातृ शक्तियों को भेंट किया।

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