इस सीज़न से चार धाम यात्रा कुछ ज़्यादा सुरक्षित हो सकती है क्योंकि हाईएल्टीट्यूड से होने वाली बीमारियों या दुर्घटना की स्थिति में बीमारों, घायलों को स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से इलाज मिल सकेगा. दरअसल यात्रा सीजन शुरू होने से पहले स्वास्थ्य विभाग यात्रा मार्गों में टेली मेडिसिन सेवा शुरू करने की तैयारी में है.
साल 2017 में हुई चार धाम यात्रा के दौरान तकरीबन 112 यात्रियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. इनमें से 91 यात्रियों को ब्लडप्रेशर, हार्ट अटैक, शुगर और दमे की बीमारियों के कारण जान गंवानी पड़ी थी. जबकि 21 यात्री दुघर्टनाओं के कारण मौत के शिकार हुए थे.
दरअसल चार धाम यात्रा के दौरान हर साल तीर्थयात्रियों के बीमार पड़ने, दुर्घटना के मामले सामने आते हैं और इनमें मौत की ख़बर आती है. इसकी सबसे बड़ी वजह यात्रा मार्गो में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी को भी माना जाता है.
चार धाम यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए इस साल चार धाम यात्रा शुरू होने से पहले टेली मेडिसिन सेवा शुरू करने की योजना है. टेली मेडिसिन तकनीक का उपयोग करने के लिए अप्रैल महीने में फ़ार्मासिस्ट, डॉक्टर और नर्सो को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉक्टर अर्चना श्रीवास्तव के अनुसार श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में स्पेशलिस्ट डॉक्टर मौजूद रहेंगे जो टेली मेडिसन के जरिए सीएचसी आने वाले मरीजों की जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें इलाज बताएंगे.


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