ऋषिकेष। स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज और पर्यटन मंत्री उत्तराखण्ड सरकार सतपाल महाराज की भेंटवार्ता हुई।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने योग, आॅक्सीजन, बर्फ, सूर्य, एडवेंचर, वैली पर्यटन के विषय मंे सतपाल महाराज से चर्चा की। उन्हांेने कहा कि इस पर पाॅलिसी बनायी जाये तो पर्यटन के माध्यम से पलायन को रोका जा सकता है। उत्तराखण्ड में शुद्ध हवा, सुबह की धूप और चमकते हुये बर्फीले पहाड़ तथा कल-कल करती हुई नदियां सहज ही सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करती है। हम इस ओर मिलकर कार्य करे तो इसे बेहद सुन्दर, स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यटन के रूप में स्थापित कर सकते है। इन सब का लाभ सैलानियों को तो मिलेगा ही साथ ही आजीविका की दृष्टि से स्थानीय लोंगो भी इससे लाभान्वित होंगे।
स्वामी ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य में पर्यटन की असीम सम्भावनायें है। हमारा राज्य बेहद खूबसूरत है। अध्यात्म और सुन्दरता का खजाना है। यहां पर अपार सम्भावनायें है। सैलानियों को आकर्षित करने की। इस पर स्वामी नेे अपने कई सुुझाव मंत्री को दिये जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिले तथा विदेशी सैलानियों की आवाजाही में इजाफा हो। साथ ही स्थानीय लोगो के लिये राज्य में ही रोजगार उपलब्ध हो सकंे।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि ’उत्तराखण्ड में अनेक देशों से लोग शान्ति और योग की तलाश में आते है अतः इस ओर हम मिलकर प्रयास करे तो इसे अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित किया जा सकता है। उन्होने कहा कि आज विश्व के सामने स्वच्छ जल और स्वच्छ वायु की अनेक समस्यायें है। लोगो को श्वास लेनेे के लिये स्वच्छ वायु नहीं मिल रही जिससे उन्हे अनेक बीमारियों का सामना करना पड़ता है। हमारे पास हिमालय रूपी स्वच्छ एवं शुद्ध आॅक्सीजन का भण्डार है। इसके लिये एक सुव्यवस्थित पाॅलिसी तैयार की जाये तो हम उत्तराखण्ड को आॅक्सीजन उत्पादक राज्य बना सकते है।’
केबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य को पर्यटन के लिये स्थापित करने हेतु जल्दी ही इन्फ्रा स्ट्रक्चर खड़ा किया जा रहा है ताकि हमारे राज्य को उत्कृष्ट पर्यटन के रूप में नई पहचान मिल सके और विदशी पर्यटकों का ध्यान इस ओर और अधिक आकर्षित किया जा सके।’
आगामी अन्तर्राष्ट्रीय महोत्सव के विषय में भी चर्चा हुई तथा योग के साथ भारत की संस्कृति एवं आध्यात्म को योग जिज्ञासुओं तक पहुंचाने के विषय मंे भी विचार मंथन किया गया।
स्वामी महाराज ने सतपाल महाराज को शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।

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