बीजेपी दफ़्तर में 19 दिन बाद जनता दरबार शुरू हुआ तो एक फ़रियाद सातवीं बार आई और इस बार तो मासूम को गोद में लिए उसके दादा को मंत्री को धरने पर बैठने की धमकी देनी पड़ी.

कृषि मंत्री सुबोध उनियाल गुरुवार को जनता दरबार में बैठे तो उनके पास फ़रियाद लेकर रामकुमार आए. बुजुर्ग रामप्रसाद अपनी आठ माह की पोती के लिए इंसाफ मांगने आए थे लेकिन अचरज की बात यह है कि वह ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. नौ महीने की भव्या के लिए इंसाफ़ मांगने के लिए कभी मां, कभी पापा और कभी दादा जनता दरबार में हाज़िर होते रहे हैं. ज़ाहिर है बाकी सारे दरवाज़े खटखटाकर वह पहले ही थक चुके हैं.

दरअसल नौ साल की भव्या जन्म से ही डॉउन सिंड्रोम नाम की लाइलाज बीमारी से पीड़ित है. देहरादून के अर्चना लूथरा अस्पताल की डॉक्टर अर्चना लूथरा की लापरवाही की वजह से ही बच्ची लाइलाज बीमारी के साथ पैदा हुई, जिसकी पुष्टि स्वास्थ्य विभाग की जांच में हुई और अस्पताल को दोषी पाया गया. लेकिन पीड़ित परिवार को आज तक परिवार को इंसाफ नहीं मिला.
जनता दरबार में शिकायतें सुनने बैठे कृषि मंत्री सुबोध उनियाल से रामकुमार ने कहा कि वह सातवीं बार इंसाफ़ की गुहार लेकर आए हैं. अगर इस बार न्याय नहीं मिला तो वह अपनी बीमार पोती को गोद में लेकर धरने पर बैठ जाएंगे.

मामला सामने आने के बाद मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उनके सामने ही यह चार बार आ चुका है. उनियाल ने कहा कि मैंने रजिस्ट्रार को बार-बार फ़ोन किया और उसने हर बार कहा है कि 10 से 15 दिनों में यह काम कर दूंगा. उनियाल ने कहा कि उन्होंने रजिस्ट्रार को साफ़ कह दिया है कि मामले का निस्तारण फरवरी के पहले हफ्ते में हो जाना चहिए.

छह जनवरी को हल्द्वानी के ट्रांस्पोर्टर प्रकाश पांडे के जनता दरबार में ज़हर खाने के बाद 25 तारीख को बीजेपी ने जनता दरबार शुरू तो कर दिया लेकिन भव्या का मामला इनके औचित्य पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. अगर जनता दरबार में भी लोगों की बातें नहीं सुनी जाएंगी तो वह क्या करेंगे? रामकुमार अपनी नौ महीने की पोती के साथ धरने पर बैठेंगे या प्रकाश पांडे जैसे हताश ट्रांस्पोर्टर ज़हर खाएंगे….

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