टिहरी। प्रकृति का रोष रूप देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर उत्तराखंड की चोटियों में हिमपात होता था, वहीं इस बार बर्फ से ढकी चोटियां की जगह उत्तराखंड के जंगल ध्ूा-ध्ूाकर जल रहे है। सुलगते जंगल को देख प्रकृति की नाराजगी साफ जाहिर हो रही है। इस साल औली में भी बर्फ न गिरने से कृत्रिम बर्फ बनाई गई। वन महकमा को आग बुझाने में कड़ी मशक्त्तफ करनी पड़ रही है।
विकासखंड भिलंगना के बाल गंगा रेंज के आधा दर्जन से अधिक गांव के जंगल आग इस समय आग की चपेट में है। जिन सीमांत गांव की चोटियों पर जनवरी माह में हिमपात और बर्फबारी से ठिठुरन पैदा होती थी, वह आज वनाग्नि से सुलग रहे हैं। भिलंगना प्रखंड के सीमांत गांव गनगर, खोला, सिल्यार गांव के तोक, कांगड़, नागेश्वर सोड़, और अपर केमर, सीमांत क्षेत्र के जंगलों में पिछले एक सप्ताह से भीषण आग लगी है। पर्याप्त संसाधन व स्टाफ की कमी के कारण वन महकमा भी आग बुझाने में नाकाम साबित हो रहा है।
वन महकमा इसे बर्निंग कंट्रोल का नाम देकर पल्ला झाड़ रहा है। वनाग्नि से कई हेक्टेयर वन संपदा जलकर नष्ट हो गई है। साथ ही पूरे क्षेत्र में धुंध फैलने से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। रेंज अधिकारी एसएस नेगी का कहना है कि क्षेत्र के कुछ क्षेत्रों में पिछले दो-तीन दिनों से आग लगी हुई है, जिसे विभाग की टीम जाकर बुझाने में लगी हुई है। अभी विभाग के पास पर्याप्त संसाधन न होने से दिक्कत आ रही है। जल्द ही वनाग्नि पर काबू पा लिया जाएगा। कुछ स्थानों पर बर्निंग कंट्रोल भी किया जा रहा है, जिससे भविष्य में जंगल आग की चपेट में न आएं।
यह सब ग्लोबल वार्मिंग के कारण हो रहा है। जहां ठंड की ठिठुरन होती थी वहां आज आग की लपटे दिख रही है।
विकासखंड भिलंगना के बाल गंगा रेंज के आधा दर्जन से अधिक गांव के जंगल आग इस समय आग की चपेट में है। जिन सीमांत गांव की चोटियों पर जनवरी माह में हिमपात और बर्फबारी से ठिठुरन पैदा होती थी, वह आज वनाग्नि से सुलग रहे हैं। भिलंगना प्रखंड के सीमांत गांव गनगर, खोला, सिल्यार गांव के तोक, कांगड़, नागेश्वर सोड़, और अपर केमर, सीमांत क्षेत्र के जंगलों में पिछले एक सप्ताह से भीषण आग लगी है। पर्याप्त संसाधन व स्टाफ की कमी के कारण वन महकमा भी आग बुझाने में नाकाम साबित हो रहा है।
वन महकमा इसे बर्निंग कंट्रोल का नाम देकर पल्ला झाड़ रहा है। वनाग्नि से कई हेक्टेयर वन संपदा जलकर नष्ट हो गई है। साथ ही पूरे क्षेत्र में धुंध फैलने से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। रेंज अधिकारी एसएस नेगी का कहना है कि क्षेत्र के कुछ क्षेत्रों में पिछले दो-तीन दिनों से आग लगी हुई है, जिसे विभाग की टीम जाकर बुझाने में लगी हुई है। अभी विभाग के पास पर्याप्त संसाधन न होने से दिक्कत आ रही है। जल्द ही वनाग्नि पर काबू पा लिया जाएगा। कुछ स्थानों पर बर्निंग कंट्रोल भी किया जा रहा है, जिससे भविष्य में जंगल आग की चपेट में न आएं।
यह सब ग्लोबल वार्मिंग के कारण हो रहा है। जहां ठंड की ठिठुरन होती थी वहां आज आग की लपटे दिख रही है।

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