उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग पिछले 2 साल से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है जहां एक तरफ विभागों में भर्ती निकाल बेरोजगारों के लिए आस जगाता है तो लम्बे समय तक इन पदों पर परीक्षा ही नहीं करवाई जाती. परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं.
एक अगस्त, 2016 में उद्यान पर्यवेक्षक के 308 पदों पर उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने भर्ती निकली तो बीएससी जीवविज्ञान, बीएससी कृषि विज्ञान और बीएससी उद्यान विज्ञान के छात्रों में सुरक्षित भविष्य के एक मौके को लेकर आस जगी.
विभाग के पदों के लिए परीक्षा की तारीख 17 मई, 2017 तय थी जिसके लिए अभ्यर्थियों ने तैयारियां शुरू कीं लेकिन एग्जाम से ठीक 10 दिन पहले आयोग की तरफ से कहा गया कि एग्ज़ाम सेन्टर की कमी के चलते परीक्षा स्थगित कर दी गई.
उसके बाद फिर 15 अक्टूबर, 2017 को परीक्षा की तारीख निर्धारित की गई लेकिन इस बार भी परीक्षा से ऐन वक्त पहले आयोग ने परीक्षा सेन्टर की कमी बताकर परीक्षा पद्द कर दी. इसके साथ ही यह भी कहा गया कि उद्यान विभाग से संबंधित कुछ नए पदों पर दोबारा विज्ञप्ति जारी की जाएगी और फिर परीक्षा करवाई जाएगी.
हैरानी की बात यह है कि इन परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को तब झटका लगा जब 10 जनवरी को आयोग की तरफ से बताया गया कि विभाग के सारे पदों के लिए निकली वेकेन्सी को रद्द किया जाता है.
हांलाकि आयोग के सचिव ने वेकेन्सी रद्द करने के दावों को खारिज कर दिया है. आयोग के सचिव संतोष बडोनी कहते हैं कि विभाग ने वेकेंसियां रद्द करने की विज्ञप्ति विभाग ने जारी ही नहीं की है और नौकरियों की विज्ञप्ति जारी करने के लिए विभागों से पत्राचार किया जा रहा है.


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