उत्तराखंड में अभी भी 33 फायर सेंटर खोले जाने की जरूरत है. उत्तराखंड बने हुए 17 साल हो गए हैं, लेकिन अभी भी फायर सेंटर नहीं खोले गए हैं. इसे लेकर पुलिस विभाग की ओर से शासन स्तर तक फाइलें भी भेजी गई हैं, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ है. सबसे बड़ी बात ये है कि गैरसैंण जहां राजधानी बनाने की बात चल रही है वहां कोई भी फायर सेंटर नहीं है.
सूबे में गर्मियों के दिनों में आग लगने की काफी घटनाएं होती है. प्रदेश में बढ़ती आबादी के लिए ये जरूरी है कि सुरक्षा के लिए और फायर सेंटर भी खोले जाये, लेकिन विडंबना है कि अभी तक उत्तराखंड में फायर सेंटर जितनी तादाद में खोले जाने चाहिए थे, अभी तक नहीं खोले गए हैं.
सरकारी तंत्र के सुस्त तरीकों से पुलिस विभाग कि भेजी गई 33 फायर सेंटर खोले जाने कि फाइल शासन में धूल खा रही हैं. पिछले सालों में सूबे में जंगलो में आग लगने की घटना और बढ़ती आबादी को देखते हुए अब जाकर उत्तराखंड सरकार ने 33 में से 6 नए फायर सेंटर खोले जाने कि सहमति दी है.
आईजी जीएस मर्तोलिया ने इस बात की जानकरी देते हुए बताया कि नए फायर सेंटर खोले जाने को लेकर शासन स्तर पर वार्ता चल रही है. आईजी जीएस मर्तोलिया ने बताया कि 33 फायर सेंटर में से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने 6 नए फायर सेंटर खोले जाने की सहमति दी है.
नए फायर सेंटर श्रीनगर, भगवानपुर, बदरीनाथ, गैरसैंण, डोईवाला और त्यूनी में खोले जाएंगे.


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