देहरादून की सिकुड़ती नदियों पर विगत 7 वर्षों से अभियान चलाती आ रही छात्र संस्था मेकिंग अ डिफरेन्स बाय बीइंग द डिफरेंस (मैड) ने जिला अधिकारी मुरुगेशन समेत सिंचाई विभाग, नगर निगम, मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एम डी डी ए), वन विभाग, जल निगम, जल संस्थान के आला अधिकारियो को रिस्पना के मुख्य क्षेत्र शिखर फाल्स से लेकर उसके बिंदाल में विलय तक का पूरा हाल दिखाया। मुख्य सचिव उत्पल कुमार के आदेश पर इन दिनों ज़िला अधिकारी रिस्पना पुनरजीवन का बुनियादी खांका तैयार करने की कसरत कर रहे हैं। इस विषय पर नवंबर से फरवरी तक मुख्य सचिव द्वारा बुलाई गई सभी विभागों की बैठक में मैड के अध्यक्ष अभिजय नेगी ने लगातार प्रस्तुति दी है। रिस्पना में नीति नियोजन पर मैड एकलौती युवा और गैर सरकारी आवाज़ है।
इको टास्क फोर्स को रिस्पना का उदगम स्थल दिखा चुकी मैड संस्था सुबह 9 बजे ही शिखर फाल्स पहुंच गयी और राजपुर की सुंदर वादियों को और हरा करने, यहां के वन्यजीवन को संग्रक्षित करने हेतु बिंदुवार सुझाव जिला अधिकारी को देती रही, और ब्रिटिश काल के लेख दिखाती रही। राजपुर से हो रहे पानी उठान पर भी मैड ने आग्रह किया कि ऐसे तरीके से ये किया जाए जिससे नदी का बहाव बना रहे।
तपोभूमि आश्रम से काठबंग्ले तक के सफर पर मैड ने बढ़ते अतिक्रमण की खौफनाक दास्तान का आँखोदेखा हाल ज़िला अधिकारी को बताया। आगे बढ़ते हुए अधोइवाला पुलिया तक नदी में आ रहे नाले जो प्रदूषण ला रहे है वो दिखाया। डी एम नदी के अलग अलग क्षेत्रों को चिन्हित करते रहे और मैड के सुझावों को लिखते रहे। मैड की ओर से एम डी डी ए द्वारा बनाए जा रहे सीवर फ्रंट की खंडहर दीवारों का भी विरोध किया गया।
इसके बाद नदी को बलबीर रोड पुलिया में पूरा सूखा देख के, हरी पुलिया पर फिर नाला दिखा। सभी विभागों को डी एम उनका काम समझाते रहे और रिस्पना और बिंदाल के संगम स्थल तक पहुंच गए। पूरी नदी को कई जगह पैदल चल कर तो कई जगह गाड़ी से मापा गया।
नदी को पुनर्जीवित करने के लिए सभी विभागों को 14 भागों पर अपनी कार्यवाही के निर्देश दिये गये। इसपर बैठक मंगलवार को बुलाई गई। मैड की ओर से अभिजय नेगी, शार्दूल असवाल, आदर्श त्रिपाठी, हृदयेश, दक्ष, विजय मौजूद रहे।


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