पिछले एक सप्ताह से भाजपा विधायक प्रणव चैंपियन अपनी ही सरकार को घेर रहे हैं. अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष से शिकायते कर रहे हैं लेकिन संगठन खामोश है और संगठन की खामोशी सरकार और सीएम के लिए मुशकिलें पैदा कर रही है.

प्रणव चैंपियन के तीखे बोल अपनी ही सरकार के एक मंत्री के खिलाफ है और इस पीड़ा को लेकर वह अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष से भी मिल आए हैं. प्रणव चैपियन भले ही इस तरह की बातें पहले भी करते आए हों. लेकिन भाजपा के किसी विधायक ने शायद पहली बार मीडिया के सामने अपनी ही सरकार और उसके मंत्री के खिलाफ आग उगली हो.

बड़ी बात यह है कि संगठन अब तक इस मामले में किसी भी तरह से उन्हे मनाने या उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही जहमत नहीं उठाई है. चैंपियन की इस जांबाजी को संगठन की चुप्पी हवा दे रही है.

लगभग एक सप्ताह पहले दिया यह बयान मीडिया की सुर्खियां बना हुआ है लेकिन संगठन अब भी कोई कार्रवाई करने से गुरेज़ कर रहा है या यूं कहे इस मामले को सुलझाने में पूरी तरह से नाकाम रहा है.
वही कांग्रेस के लिए ये मसला मौका लेकर आया है बजट सत्र से ऐन पहले पार्टी के अंदर की गुटबाजी बता रही है कि भाजपा संगठन में और सरकार में सब ठीक नहीं है. पार्टी अध्यक्ष प्रीतम सिंह इसे सरकार की विफलता बता रहे हैं.

संगठन खामोश है और चैंपियन बयान पर बयान दे रहे है. एक हफ्ते बाद भी पार्टी इस मामले से निपटने में पूरी तरह से नाकाम रही है.

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