प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट नमामि गंगे को साकार करने के लिए लाख प्रयास किए जाने के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन करोड़ों की धनराशी खर्च होने के बाद भी मां गंगा प्रदूषण मुक्त नहीं हो पा रही है. ऐसा हम नहीं बल्कि कैबिनेट मंत्री भी इसे स्वीकार कर रहे हैं. संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत की माने तो गंगा एक्शन प्लान वन और टू के तहत बीते दो दसकों से गंगा सफाई के जो कार्य किए जा रहे हैं, वे उतने सफल नहीं हो पाए हैं. हालांकि, केन्द्र सरकार ने नमामि गंगे योजना के तहत गंगा को गंगोत्री से गंगा सागर तक गंगा की स्वच्छता को बरकरार रखने के लिए एक्शन प्लान तैयार किया है.
कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत ने बताया कि उत्तराखंड ने पहले चरण के दौरान कई योजनाओं को पूरा कर लिया है. गंगा के किनारे सीवरेज मेनेजमेंट लगाने का कार्य भी अपने अंतिम चरण में है. प्रदेश की त्रिवेन्द्र सरकार भले ही तीर्थ नगरी हरिद्वार के जगतपुर मे 68 एमएलडी के एसपीटी को स्थापित करने का दावा कर रही हो, लेकिन गंदे नालों का गंगा मे शामिल होने को आज भी नहीं रोक पा रही है.
पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सूत्रों की माने तो बोर्ड की ओर से की जा रही रियल टाइम रिपोर्टिंग के आकड़े गंगा के प्रदूषण की तस्दीक के लिए काफी है. कैबिनेट सचिव प्रदीप कुमार सिन्हा ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नमामि गंगे कार्यक्रम की समीक्षा कर देवभूमी मे गंगा के ताजा हालात का फीडबैक लिया. जबकि संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने 13 प्रोजेक्ट पूरा कर लिए जाने का दावा किया है.
प्रकाश पंत ने कहा कि उत्तराखंड सरकार मां गंगा की सफाई को लेकर प्रतिबद्ध है. गंगा की सफाई के लिए शुरू किए सभी प्रयोजनाएं तय समय पर पूरी कर ली जाएंगी.
विभागीय सूत्र भले ही गंगोत्री से ऋषिकेश तक कई एसे स्थान होने का इशारा कर रहे हैं जहां गंगा प्रदूषित है. इसके बावजूद अब देखना होगा कि आखिर किस फॉर्मूले पर केन्द्र और राज्य सरकार गंगा को हकीकत में स्वच्छ और निर्मल बना पाएगी.


Post A Comment: