मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत गुरुवार को कटारपुर पहुंचे जहां उन्होंने कटारपुर गौरक्षक बलिदान दिवस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की. मुख्यमंत्री ने गांव में बनाए गए गौ स्मारक पर माल्यार्पण किया. इस दौरान संतों के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक और कई विधायक भी शामिल हुए कार्यक्रम में भाजपा बजरंग दल और विहिप के भारी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ स्थानीय ग्रामीण भी शामिल हुए.

राज्य सरकार कटारपुर को गौ तीर्थ के रूप में विकसित किए जाने का ऐलान कर चुकी है. बीते साल पशुपालन मंत्री रेखा आर्य ने कहा था कि सरकार कटारपुर गांव को गो तीर्थ के रूप में विकसित करेगी और इसके लिए क्षेत्र का सर्वे किया जा रहा है. कटारपुर में गो हत्या का विरोध करने पर 1918 में कई लोग मारे गए थे. इस कांड में चार लोगों को फांसी, 130 को कालापानी और कई लोगों को 10-10 साल की सजा हुई थी.

कटारपुर को गौ तीर्थ बनाने के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कटारपुर पहले से ही गौ तीर्थ है. गाय के लिए इस गांव में पहले ही लोगों ने अपने प्राणों की बलिदान दिए हैं, फांसी पर चढ़े हैं.

उन्होंने कहा कि भारत को गाय, गंगा और गीता की संस्कृति कहा गया है. अब इस गौ तीर्थ के लिए और क्या किया जा सकता है वह हम देखेंगे.
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि गौ, गगा, गीता, गायत्री को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ सरकार की नहीं है बल्कि देश में सभी की है और सबको इस बारे में विचार करना चाहिए.

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