ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश के आयुष एवं सर्जरी विभाग द्वारा क्षार सूत्र पर लाइव ऑपरेटिव कार्यशाला का आयोजन किया गया इस कार्यशाला का शुभारंभ एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत द्वारा किया गया, प्रोफेसर रवि कांत ने कहा कि भारत को प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों की अतुलनीय विरासत प्राप्त है। जिसमें आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्धा, और होम्योपैथी शामिल है, उन्होंने कहा आयुष आधुनिक चिकित्सा का एक विकल्प बन गया है तथा उन्होंने ये भी कहा कि इस क्षेत्र में रिसर्च पर ज्यादा फोकस करने की जरूरत है।
कार्यशाला में बीएचयू से आए कोऑर्डिनेटर एनआरसी डॉ एम साहू द्वारा प्रतिभागियों को बताया गया कि किस तरह से क्षार सूत्र द्वारा फिश्चुला (भगन्दर) का इलाज किया जाता है तथा क्षार सूत्र थेरेपी एक आयुर्वेदिक पैरा सर्जिकल तकनीक है जो कि 30 से 45 मिनट में पूरी हो जाती है।
कार्यशाला में डॉ. विजेंद्र सिंह ने फिश्चुला तथा उसके आसपास के अंगो की शारीरिक संरचना के बारे में बताया।
डॉ. सुधीर सक्सेना ने फिश्चुला के डायग्नोसिस के लिए विभिन्न रेडियोलॉजिकल विधियों के बारे में विस्तार से बताया। डॉ० सोम प्रकाश बासु ने आजकल प्रयोग होने वाले विभिन्न प्रकार के नवीनतम इलाज की प्रक्रियाओं की जानकारी दी साथ ही उन्होंने बताया कि कई बार एलोपैथिक सर्जरी के बाद भी मरीज पूर्ण रूप से ठीक नहीं हो पाता, जबकि क्षार सूत्र विधि से फिश्चुला का जड़ से इलाज किया जाता है। आयुष विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. वर्तिका सक्सेना ने बताया कि एम्स ऋषिकेश के आयुष विभाग में आयुर्वेदिक, योग, होम्योपैथी सेवाएं दे रहा है, शीघ्र ही विभाग आयुर्वेदिक एवं नेचुरोपैथी कि थैरेपी शुरु करने जा रहा है जिसमें पंचकर्म भी शामिल है। जिसका लाभ सभी व्यक्ति न्यूनतम शुल्क पर उठा सकते हैं इसके अलावा विभाग इन भारतीय पद्धति को विश्वस्तरीय गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न तरह के अनुसंधानों को बढ़ावा दे रहा है।
कार्यक्रम समाप्ति पर डॉ० फरहानुल हुदा द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव दिया गया। कार्यक्रम का संचालन आयुष विभाग से वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ० मीनाक्षी जगझापे द्वारा संचालित किया गया।इस मौके पर डीन (एकेडमिक) डॉ० सुरेखा किशोर, प्रोफ़ेसर बीना रवि, सर्जरी विभाग, प्रोफ़ेसर वर्तिका सक्सेना, विभागाध्यक्ष आयुष, तथा डॉ० अन्विता सिंह, डॉ० रविंद्र अन्थवाल, एवं डॉ० विंतेश्वरी नौटियाल, आरती, किरन, सुषमा, सीमा, दीपचंद जोशी, संदीप भंडारी, अत्रेश उनियाल, संदीप कंडारी, प्रमोद, राजीव पंत, अंकित जुयाल, शामिल थे।
कार्यशाला में बीएचयू से आए कोऑर्डिनेटर एनआरसी डॉ एम साहू द्वारा प्रतिभागियों को बताया गया कि किस तरह से क्षार सूत्र द्वारा फिश्चुला (भगन्दर) का इलाज किया जाता है तथा क्षार सूत्र थेरेपी एक आयुर्वेदिक पैरा सर्जिकल तकनीक है जो कि 30 से 45 मिनट में पूरी हो जाती है।
कार्यशाला में डॉ. विजेंद्र सिंह ने फिश्चुला तथा उसके आसपास के अंगो की शारीरिक संरचना के बारे में बताया।
डॉ. सुधीर सक्सेना ने फिश्चुला के डायग्नोसिस के लिए विभिन्न रेडियोलॉजिकल विधियों के बारे में विस्तार से बताया। डॉ० सोम प्रकाश बासु ने आजकल प्रयोग होने वाले विभिन्न प्रकार के नवीनतम इलाज की प्रक्रियाओं की जानकारी दी साथ ही उन्होंने बताया कि कई बार एलोपैथिक सर्जरी के बाद भी मरीज पूर्ण रूप से ठीक नहीं हो पाता, जबकि क्षार सूत्र विधि से फिश्चुला का जड़ से इलाज किया जाता है। आयुष विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. वर्तिका सक्सेना ने बताया कि एम्स ऋषिकेश के आयुष विभाग में आयुर्वेदिक, योग, होम्योपैथी सेवाएं दे रहा है, शीघ्र ही विभाग आयुर्वेदिक एवं नेचुरोपैथी कि थैरेपी शुरु करने जा रहा है जिसमें पंचकर्म भी शामिल है। जिसका लाभ सभी व्यक्ति न्यूनतम शुल्क पर उठा सकते हैं इसके अलावा विभाग इन भारतीय पद्धति को विश्वस्तरीय गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न तरह के अनुसंधानों को बढ़ावा दे रहा है।
कार्यक्रम समाप्ति पर डॉ० फरहानुल हुदा द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव दिया गया। कार्यक्रम का संचालन आयुष विभाग से वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ० मीनाक्षी जगझापे द्वारा संचालित किया गया।इस मौके पर डीन (एकेडमिक) डॉ० सुरेखा किशोर, प्रोफ़ेसर बीना रवि, सर्जरी विभाग, प्रोफ़ेसर वर्तिका सक्सेना, विभागाध्यक्ष आयुष, तथा डॉ० अन्विता सिंह, डॉ० रविंद्र अन्थवाल, एवं डॉ० विंतेश्वरी नौटियाल, आरती, किरन, सुषमा, सीमा, दीपचंद जोशी, संदीप भंडारी, अत्रेश उनियाल, संदीप कंडारी, प्रमोद, राजीव पंत, अंकित जुयाल, शामिल थे।


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