इस साल के आम बजट में सबसे ज्यादा बात खेती और किसानों को लेकर हुई है. उत्तराखंड राज्य को देखते हुए माना जा रहा है कि बजट से किसानों का जहां विकास होगा, वहीं देवभूमि के दिन भी बहुरेंगे.

उत्तराखंड में करीब 10 लाख किसान हैं, जो जैविक खेती के ज़रिए अच्छी आय कर सकते हैं. उत्पाद का सही दाम मिले, इसलिए ग्रामीण कृषि बाजार को मंडी से जोड़ा जाएगा.

पहाड़ी इलाकों में क्लस्टर खेती को बढ़ावा मिलेगा. एरोमैटिक (सगंध) प्लांट के राज्य के 740 गांव में 109 क्लस्टर बनाए जा चुके हैं.

18 हज़ार किसान एरोमैटिक प्लांट की खेती से जुड़ गए हैं. एरोमैटिक प्लांट की खेती से सालाना टर्नओवर 70 लाख रुपये तक है.
बजट से इस बात की भी उम्मीदें बढ़ी हैं कि पहाड़ों में सिंचाई के सिस्टम में सुधार आएगा.

दरसअल प्रधानमंत्री कृषि योजना के तहत 2600 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. 96 ज़िलों के लिए बजट जारी किया गया है.

राज्य के मैदानी जिलों में तो सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है लेकिन पहाड़ी ज़िलों में आज भी सिंचाई को लेकर दिक्कतें हैं. पहाड़ के 45 हजार हेक्टेयर में नाममात्र की सिंचाई सुविधा है. 17 साल में करीब 70 हजार हेक्टेयर भूमि बंजर हो गई है. माना जा रहा है कि अब खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचेगा.

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