मसूरी शहर में कश्मीरी व्यापारियों को 28 फरवरी के बाद व्यापार नहीं करने देने के फ़ैसले को लेकर अब शहर व्यापार मंडल के तेवर ढीले पड़ गए हैं. पिछले साल जून में मसूरी ट्रेडर्स एसोसिएशन ने फैसला लिया था कि 28 फरवरी, 2018 के बाद मसूरी में किसी भी कश्मीरी व्यापारी को व्यापार नहीं करने देंगे लेकिन जैसे ही तय सीमा नजदीक आ रही है वैसे ही इस मुद्दे पर अलग-अलग आवाज़ें सुनाई देने लगी हैं.
बीते साल जून में शहर में कुछ लोगों ने कथित रूप से पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए गए थे. इसके अलावा कश्मीर में भारतीय सेना पर पत्थर फेंकने की घटना के बाद मसूरी में काम करने वाले कश्मीरी व्यापारियों के प्रति स्थानीय लोगों को गुस्सा भड़क गया था.
मसूरी के आक्रोशित व्यापारियों ने शहर में कश्मीरी व्यापारियों को 28 फरवरी 2018 तक दुकानें खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया था लेकिन अब मसूरी ट्रेडर्स एसोसिएशन और कुछ उत्साही भाजपा नेता अपने बयान से पलट गए हैं.
भाजपा नेता और मसूरी ट्रेडर्स एसोसिएशन से जुड़े व्यापारी कह रहे हैं कि कश्मीरी दुकानदार अपने एग्रीमेंट के मुताबिक व्यापार कर सकते है. मसूरी के भाजपा नेता धर्मपाल पंवार कहते हैं कि मसूरी में पहले से काम कर रहे कश्मीरियों से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है लेकिन नए आए लोग माहौल ख़राब कर रहे हैं इसीलिए यह फ़ैसला लिया गया था.
हालांकि वह कहते हैं कि जब तक इन लोगों को दुकान मालिकों के साथ अनुबंध चल रहा है तब तक ये लोग काम कर सकते हैं. उन्हें जबरन भगाने की बात कोई नहीं कर रहा है.
मसूरी ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल कहते हैं कि मसूरी की शांति बनाए रखने के लिए ज़रूरी है कि दुकानदार अनुबंध ख़त्म होने के बाद दुकान खाली कर दें किसी तरह का विवाद खड़ा करने की कोशिश न करें.
मसूरी में काम कर रहे कश्मीरी व्यापारी अल्ताफ़ कहते हैं कि उनसे से तो किसी ने सीधे नहीं कहा लेकिन उन्होंने ऐसा सुना था कि कश्मीरी व्यापारियों को दुकानें खाली करने को कहा जा रहा है लेकिन प्रशासन ने इस मामले में दखल दिया था. एसडीएम ने उन्हें आश्वासन दिया है कि कानून के ख़िलाफ़ किसी को काम नहीं करने दिया जाएगा, वह आराम से व्यापार कर सकते हैं.


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