राज्य सरकार भले ही लिंगानुपात सुधरने के लाख दावे कर रहा हो लेकिन सच्चाई ये है कि राज्य में लिंगानुपात घटता जा रहा है. नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड में बच्चों को जन्म के समय लिंगानुपात में 27 अंकों की कमी दर्ज की गई है. उत्तराखंड की ये स्थिति ठीक नहीं है. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नाम पर यूं तो केंद्र और राज्य सरकार कई अभियान चला रही हैं, लेकिन नीति आयोग की रिपोर्ट में उत्तराखंड समेत देश के 17 राज्यों में लिंगानुपात में गिरावट आई है.

उत्तराखंड में जन्म के समय लिंगानुपात 1 हजार लड़कों पर 844 लड़कियों का है. जबकि साल 2011 की जनगणना के मुताबिक राज्य में कुल लिंगानुपात 1 हजार लड़कों पर 963 लड़कियां थी. जन्म के समय बेटियों की संख्या में आई कमी वाकई एक बड़ी चिंता का कारण है.

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार जन्म के समय लिंगानुपात मामले में 10 या उससे ज्यादा प्वाइंट्स की पर्याप्त गिरावट होने वाले राज्यों में से एक गुजरात में प्रति 1,000 पुरुषों पर 907 महिलाओं के अनुपात से गिरकर अब 854 हो गया है. यहां साल 2012-14 ( आधार वर्ष) से 2013-15 (संदर्भ वर्ष) के बीच 53 प्वाइंट्स की गिरावट हुई है.

स्वस्थ राज्य, प्रगतिशील भारत की रिपोर्ट के अनुसार गुजरात के बाद हरियाणा का स्थान है. यहां 35 प्वाइंट्स की गिरावट दर्ज हुई है. इसके बाद राजस्थान (32 प्वाइंट्स), उत्तराखंड (27 प्वांइट्स), महाराष्ट्र (18 प्वाइंट्स), हिमाचल प्रदेश (14 प्वाइंट्स), छत्तीसगढ़ (12 प्वाइंट्स) और कर्नाटक (11 प्वाइंट्स) की गिरावट हुई है.
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जन्म के समय लिंगानुपात के मामले में पंजाब में सुधार हुआ है. यहां 19 प्वाइंट्स की वृद्धि हुई है. वहीं उत्तर प्रदेश में 10 प्वाइंट्स तथा बिहार में नौ प्वाइंट्स की वृद्धि हुई है.

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