उत्तराखंड विधानसभा में बजट पेश किए जाने के बाद अब बजट की समीक्षा का दौर भी शुरू हो गया है. एक ओर जहां बजट पर सदन मे चर्चा शुरू हो गई है, तो जानकारों का मानना है कि बजट में शामिल प्रावधानों के लिए आय के संसाधन जुटाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी. जानकारों की माने तो राज्य के मौजूदा आर्थिक हालात बेहद ही चिंताजनक हैं. यही हालात रहे तो भविष्य में प्रदेश पर कर्ज का बोझ और बढ़ेगा.

जानकार बजट पर कई सवाल खडे कर रहे हैं. ऐसे में सभी घोषणाओं को आखिर किस फॉर्मूले पर पूरा करेगी. करीब 10 हजार करोड़ रुपए कर्ज लिया जाना संभावित है. कुछ कर्ज बाजार से लिए जाने की भी उम्मीद जताई जा रही है, ताकि 45 हजार करोड़ रुपये के आकड़े को पूरा किया जा सकेगा.

गौरतलब है कि राज्य पर बीते वर्ष कर्ज की राशी 4400 करोड़ रुपये है, जबकि इस साल 4900 करोड़ रुपये यानी ब्याज का 5000 करोड़ रुपये का और कर्ज का बोझ राज्य पर बढ़ जाएगा. बीते साल केन्द्र से अनुमान से 337029 करोड़ रुपये कम धनराशि प्राप्त हुई थी. कुल कम होने वाले खर्च 1964.91 करोड़ रुपये के हैं. इसमें 1465 सामाजिक सेवाओं की धनराशि भी शामिल है.

राज्य सरकार की कुल प्राप्तियां 35 हजार करोड़ के करीब की है. बजट में 45 हजार करोड़ से अधिक घनराशी का है, लिहाजा सरकार को करीब 10 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी है. जबकि राज्य के आमदनी के सीमित साधन होने के चलते पिछली बार 40 हजार करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया था. जिसमें से खर्च महज 38 हजार करोड़ रुपये ही हो पाया था. ऐसे मे बजट खर्च को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं.

Post A Comment: