जोशीमठ (नितिन सेमवाल)।अलकनंदा और धौली गंगा के संगम पर गंगा समग्र कलश यात्रा का भव्य स्वागत किया गया।
उत्तराखंड के प्रथम प्रयाग विष्णुप्रयाग के संगमतट पर मां गंगा का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर गंगा मां की आरती की गई। पहाड की महिलाओं ने पारम्परिक वेशभूषा में गंगा के इस पावन तट पर झूमेला लगाकर नृत्य भी किया। दूसरी तरफ सैकडाें गंगा भक्ताें की उपस्थिति में गंगा समग्र जन-जागरण कलश यात्रा बदरीनाथ के अलकनन्दा नदी के किनारे स्थित नारद कुंड से पवित्र गंगाजल लेकर विष्णुप्रयाग संगम पर पहुची। यात्रा के संयाेजक माेहन सिंह गांववासी के नेतृत्व में बदरीपुरी विष्णुप्रयाग पँहुची। इस यात्रा नें पंचप्रयागों से हाेकर हरिद्वार पहुंचना है। विष्णुप्रयाग तट पर गंगा पूजन के साथ भव्य आरती कर गंगा काे स्वच्छ निर्मल सहित गंगा सरंक्षण का संकल्प लिया गया। जिसमें लोगों में गजब का उत्साह देखा गया है। पंचप्रयागाें के अस्तित्व महत्व सहित गंगा काे स्वच्छ निर्मल रखनें का संदेश दे रही यह कलश यात्रा, बदरीनाथ धाम से पंचप्रयाग हाेकर हरिद्वार में सम्पन होगी। इस यात्रा को लेकर गंगा को बचाने के लिये हजारों की संख्या में जुड रहे है। दरसल यह बात सत्य है भी है कि आने वाले समय में पानी को लेकर जो जंग होने वाली है उसका यह शुभारंभ भी है आज से ही हर मनुष्य को गंगा को बचाने के लिये आगे आना ही होगा।
उत्तराखंड के प्रथम प्रयाग विष्णुप्रयाग के संगमतट पर मां गंगा का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर गंगा मां की आरती की गई। पहाड की महिलाओं ने पारम्परिक वेशभूषा में गंगा के इस पावन तट पर झूमेला लगाकर नृत्य भी किया। दूसरी तरफ सैकडाें गंगा भक्ताें की उपस्थिति में गंगा समग्र जन-जागरण कलश यात्रा बदरीनाथ के अलकनन्दा नदी के किनारे स्थित नारद कुंड से पवित्र गंगाजल लेकर विष्णुप्रयाग संगम पर पहुची। यात्रा के संयाेजक माेहन सिंह गांववासी के नेतृत्व में बदरीपुरी विष्णुप्रयाग पँहुची। इस यात्रा नें पंचप्रयागों से हाेकर हरिद्वार पहुंचना है। विष्णुप्रयाग तट पर गंगा पूजन के साथ भव्य आरती कर गंगा काे स्वच्छ निर्मल सहित गंगा सरंक्षण का संकल्प लिया गया। जिसमें लोगों में गजब का उत्साह देखा गया है। पंचप्रयागाें के अस्तित्व महत्व सहित गंगा काे स्वच्छ निर्मल रखनें का संदेश दे रही यह कलश यात्रा, बदरीनाथ धाम से पंचप्रयाग हाेकर हरिद्वार में सम्पन होगी। इस यात्रा को लेकर गंगा को बचाने के लिये हजारों की संख्या में जुड रहे है। दरसल यह बात सत्य है भी है कि आने वाले समय में पानी को लेकर जो जंग होने वाली है उसका यह शुभारंभ भी है आज से ही हर मनुष्य को गंगा को बचाने के लिये आगे आना ही होगा।


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