जनता दल सेक्यूलर (JDS) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उस बयान को हास्यास्पद करार दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कर्नाटक के युवा बीजेपी के खिलाफ हैं और इन युवाओं को शांत करने के लिए उनकी पार्टी काम कर रही है.
CNN-News18 की रिपोर्टर दीपा बालाकृष्णनन से एक्सक्सूसिव बातचीत में देवगौड़ा ने कहा, "राहुल गांधी में नेतृत्व की बहुत कमी है. उन्हें अभी तक यह समझ नहीं आया कि देश के अल्पसंख्यकों के उत्थान में जेडीएस का क्या और कितना योगदान है." देवगौड़ा रविवार को एक चुनाव रैली के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे.
दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जेडीएस को बीजेपी की 'बी टीम' बताया है. राहुल का कहना है कि कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस के अलावा किसी पार्टी को वोट देने का सीधा मतलब बीजेपी को फायदा पहुंचाना है.
पढ़ें, एचडी देवगौड़ा से हुई बातचीत के मुख्य अंश...
जेडीएस को बीजेपी की टीम-B बताया गया है, इसपर आपकी प्रतिक्रिया क्या है?
-राहुल गांधी को पहले कर्नाटक की राजनीति को समझना चाहिए. उन्हें राज्य को लोकल नेता जो बता रहे हैं, राहुल वहीं कह रहे हैं. राहुल अभी भी युवा है और राजनीतिक रूप से मेच्योर नहीं है. उन्हें अभी विकसित और परिपक्व नेतृत्व के लिए लंबी दूरी तय करनी है.
राहुल को सबसे पहले यह समझना होगा कि पीएम और कर्नाटक का सीएम रहते हुए मैंने अल्पसंख्यकों के लिए क्या किया? तब राहुल भारत में नहीं थे. वो विदेश में पढ़ाई कर रहे थे. कम से कम उन्हें अपनी मां सोनिया गांधी से इस बारे में जरूर पूछना चाहिए.
राहुल गांधी को तो यह तक नहीं मालूम कि उस पार्टी के बारे में कैसे बात किया जाए, जिसका नेतृत्व एक पूर्व पीएम कर रहा हो. वो अभी भी चिट देखकर भाषण देते हैं. उसमें से लिखा होता है, वही बोलते हैं. राहुल मुझसे सर्टिफिकेट चाहते हैं? मैंने ही ईदगाह मैदान का विवाद सुलझाया था. देश में आरक्षण लाने वाला मैं ही था.
धर्मनिरपेक्ष दलों को एक साथ लाने के लिए एक राष्ट्रीय अभियान चल रहा है. इसमें जेडीएस खुद को कहां पाता है?
-साल 2019 का चुनाव लड़ने के लिए दो तरह के विचार, दो तरह के दृष्टिकोण काम कर रहे हैं. एक एंटी-एनडीए या एंटी-बीजेपी है. जो लोग ऐसा महसूस करते हैं वो ये चाहते हैं कि सभी सेक्युलर पार्टियां एक साथ आ जाएं.
दूसरे विचारधारा से जुड़े लोग चाहते हैं कि एक ऐसा मोर्चा बने जिसमें बीजेपी और कांग्रेस दोनों शामिल न हो. साल 2019 के चुनावों को लड़ने के लिए अन्य सभी क्षेत्रीय पार्टियों को एक साथ आना चाहिए, यही हमारी स्थिति है.
लेकिन फिलहाल मैं खुद को कर्नाटक तक सीमित करूंगा. अगले 65 दिनों तक मैं अपना दिमाग राष्ट्रीय राजनीति में नहीं लगाऊंगा. विधानसभा चुनाव खत्म होने तक मेरा ध्यान पूरी तरह से कर्नाटक पर केंद्रित होगा. मैं दिल्ली भी नहीं जाऊंगा, क्योंकि हर एक मिनट मेरे लिए कीमती होगा.
इसके बाद मैं देश के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाऊंगा. उस फैसले में कोई व्यक्तिगत हित या लाभ नहीं होगा. मैं पहले ही प्रधानमंत्री रह चुका हूं. मेरी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है. मैं देश को सांप्रदायिक और कट्टरपंथी ताकतों से मुक्त देखना चाहता हूं, जो देश को तोड़ रहे हैं.
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि इस चुनाव में वो आपके परिवार के सदस्यों को हराना चाहते हैं?
-सिद्धारमैया कौन हैं? उन्हें राज्य के सबसे खराब सरकारों में गिना जाता है. यहां कोई कानून और व्यवस्था नहीं है, बस भ्रष्टाचार फैला हुआ है. अगर वो सोचते हैं कि कुछ विज्ञापन देकर वो इन कमियों से बाहर आ जाएंगे तो वो सपने में जी रहे हैं.
लेकिन वो आपको आपके शहर हसन में ले जाना चाहते हैं?
-वह मुझे पहले ही हसन में ले आए हैं. जाने दो. उन्हें कदम उठाने दो. हमें चुनाव परिणाम का इंतजार करना चाहिए.
इस बार त्रिशंकु विधानसभा की उम्मीद की जा रही है, अगर ऐसा हुआ तो जेडीएस किसके साथ जाएगी?
-किसी के साथ जाने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता. हम विपक्ष में बैठेंगे और सच्चे विपक्षी के रूप में काम करेंगे. कुमारस्वामी(उनके बेटे) नेता होंगे.


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