भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार की मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ने वाली हैं. मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस मंगलवार को एनडीए सरकार के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाने जा रही है. कांग्रेस ने इसके लिए चिट्ठी लिखकर सभी दलों से अविश्वास प्रस्ताव पर समर्थन की अपील की है.

लोकसभा में विपक्ष नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने 23 मार्च को इस संबंध में लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन को एक चिट्ठी लिखी थी. बता दें कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए स्पीकर के नोटिफिकेशन की जरूरत होती है.

क्यों लाया जा रहा है अविश्वास प्रस्ताव?
दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल अपने अपने वोटरों को ये बताना चाहते हैं कि वो केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के साथ हैं या फिर सरकार के विरोध में खड़े हैं, और अगर विरोध है तो वो किन मुद्दों पर है. इसी क्रम में कांग्रेस मंगलवार को एनडीए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने जा रही है.



अब शरद पवार की डिनर डिप्लोमेसी
ऐसे में अगर यूपीए को मजबूत करना है तो एक ऐसा चेहरा सामने आए जिसे सभी पसंद करें. इस काम के लिए एन.सी.पी नेता शरद पवार सबसे बड़े दावेदार नजर आ रहे हैं. मंगलवार शाम शरद पवार ने सभी विपक्षी दलों को डिनर पर बुलाया है. उससे पहले उनकी मुलाकात ममता बैनेर्जी से अलग से भी हो सकती है. ममता दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी मुलाकात कर सकती हैं. उधर यूपी में अखिलेश यादव और मयावती के साथ आने पर विपक्ष उत्साहित नज़र आ रहा है.

संसद में क्या है कांग्रेस की पोजिशन?
कांग्रेस के 48 सांसद हैं. इस तरह सरकार के खिलाफ प्रस्ताव लाने के लिए जरूरी 50 सांसदों का आंकड़ा आराम से जुट जाएगा. इसके साथ ही लेफ्ट फ्रंट, आप और बाकी विपक्षी दल भी सरकार के खिलाफ लामबंद हो चुके हैं. इस तरह सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने में कोई मुश्किल नहीं होने वाली.

टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस पहले ही कर चुकी कोशिश
बता दें कि इससे पहले आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी (TDP) और उनके धुर विरोधी जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस भी एनडीए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का ऐलान किया था.

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