उत्तराखंड वाटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट को केंद्र ने 910 करोड़ की सैद्धांतिक सहमति दे दी है. केन्द्र से यह पैसा मिलने से न सिर्फ प्रदेश की असिंचित भूमि में सिंचाई संभव हो पाएगी बल्कि राज्य के खाद्यान्न भंडार में वृद्धि होगी होगी और कृषि उद्यान की कई योजनाएं भी हकीकत बन सकेंगी.
राज्य के हर खेत तक पानी पहुंचाने के लिए सिंचाई विभाग ने उत्तराखंड वाटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट तैयार किया है. 910 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने सैद्धांतिक रूप से सहमति प्रदान कर दी है. विश्व बैंक की मदद से संचालित होने वाले इस प्रोजेक्ट में केंद्र और राज्य का हिस्सा 90:10 के अनुपात में होगा राज्य में सिंचाई के तीन प्रमुख संसाधनों में नहरें, नलकूप और पंप नहरें हैं.
प्रमुख सचिव सिंचाई आनंद वर्द्धन ने गर्मियों के मद्देनज़र सिंचाई सुविधाओं को बेहतर करने के लिए ग्रांउड जीरो पर वर्क करने वाले कर्मचारीयो को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं.
राज्य में खेती भूमि 7.142 लाख हैक्टेयर है जिसके अनुपात में सिंचित क्षेत्रफल महज 3.394 लाख हेक्टेयर ही है. यानि प्रदेश में 3.748 लाख हैक्टेयर खेती भूमि असिंचित है. इसी असिंचित खेती की ज़मीन तक पानी पहुंचाने के लिए सिंचाई विभाग ने उत्तराखंड वाटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट तैयार किया गया है.
इस प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश में नए बैराज,पंप नहरें बनाई जाएंगी और ट्यूबेल भी लगेंगे. इसके लिए विश्व बैंक के अधिकारी फील्ड विजिट कर इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट डीपीआर तैयार करेंगे ताकि इस प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश में जल संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा दिया जा सके.
केन्द्र से सैद्वांतिक स्वीकृति के बाद अब देखना होगा कि विभागीय तंत्र इसका कितना सदुपयोग कर पाएगा.


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