ऋषिकेश। जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासविच साध्वी भगवती सरस्वती के सान्निध्य एवं संरक्षण में तथा में हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष शंकर सान्याल के मार्गदर्शन में गांधी आश्रम में आयोजित विशेष स्वास्थ्य एवं स्वच्छता शिविर में भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत रिचर्ड वर्मा, उनकी धर्मपत्नी पिंकी वर्मा और बच्चे जो रिचर्ड, डिलन रिचर्ड और लुसी रिचर्ड ने सहभाग किया।
गांधी आश्रम वह ऐतिहासिक स्थल है जहां पर आजादी के पूर्व बापू जी एवं बा निवास करते थे। भारत की आजादी से पूर्व यहां पर अनेक महत्वपूर्ण निर्णय एवं गोष्ठियों का आयोजन किया गया था आज एक ऐतिहासिक स्थल में देश और विदेश की विशिष्ट हस्तियों ने छात्र-छात्राओं को स्वच्छता का पाठ पढ़ाया। साथ ही आज के इस विशेष कार्यक्रम में 300 से अधिक छात्र-छात्राओं तथा पास की झुग्गी बस्ती के लोगों को नये सुन्दर कपड़े, छाता, फल, स्वच्छता किट का वितरण किया गया। इस अवसर पर विशाल भण्डारा भी आयोजित किया गया।
इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि ‘हर व्यक्ति के जीवन की शुरूआत कोरे पन्ने से होती है। अपने सद्चारण, व्यवहार एवं सामाजिक दायित्व के माध्यम से उन पन्नों को अलंकृत किया जाता है। बच्चे ईश्वर के समरूप छाप लेकर जन्म लेते है और हम संस्कारों के माध्यम से इस छाप को अमिट बना सकते है। इन्ही संस्कारों के माध्यम से उनके अन्दर युवावस्था तक मानवीय गरिमा विकसित हो जाती है इसलिये कहा जाता है ’युवा भविष्य का निर्माता है’ अतः युवाओं को अपने जीवन के साथ ही विश्व परिवार की जिम्मेदारी भी सम्भालनी होगी सनातन धर्म हमें यही शिक्षा देता है। भारतीय संस्कृति का मूलमंत्र है आपसी प्रेम जिसमें मानव के साथ प्रकृति को भी बराबर का स्थान दिया गया है। उन्होने कहा सभ्य और सुसंस्कृत समाज में अस्पृश्यता जैसे शब्दों का कोई स्थान नहीं है। हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम की ह,ै विश्व एक परिवार है यह हमारा मूल मंत्र है इस भावना से नियंता ने बनायी इस पृथ्वी को दर्शन करे। स्वामी जी ने कहा कि विचारों  और वातावरण में शुद्धता होना जरूरी है तभी कोई भी राष्ट्र प्रगति कर सकता है।’
स्वामी महाराज ने सभी को स्वस्थ, स्वच्छ एवं हरित भारत का संकल्प कराया। इस पावन अवसर पर हरिजन सेवक संघ के महासचिव रजनीश, उपाध्यक्ष नरेश, पुणे से आया दल साथ ही प्रगति संस्था, गुड़गांव, किट कथा संस्था जो महिलाओं के लिये कार्य कर रही है से गीताजंलि और बबिता एवं अन्य लोगों का सराहनीय योगदान रहा।

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