ऋषिकेश, 15 अप्रैल। अखिल भारतीय आशा कर्मचारी महासंघ के प्रथम त्रिवार्षिक अधिवेशन में रविवार को देशभर की आशा वर्करों से जुड़ी समस्याओं पर मंथन किया गया। सर्वसम्मति से आशा वर्कर के इंसेंटिव की जगह न्यूनतम 18 हजार वेतनमान और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के प्रस्ताव को पारित किया गया। टीएचडीसी के सामुदायिक केंद्र में आयोजित दो दिवसीय प्रथम त्रिवार्षिक अधिवेशन के दूसरे दिन रविवार को आशा वर्कर को सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सुधार आदि मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें प्रमुख मांग आशा वर्कर और आशा संगिनी को न्यूनतम वेतनमान 18 हजार से 24 हजार, सेवानिवृत्ति की पालिसी बनाकर 5 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन, इम्पलाइज प्रॉविडेंड फंड की सुविधा, दुर्घटना बीमा के रूप में 5 लाख का प्रावधान, जननी सुरक्षा योजना में अनुभवी आशा वर्कर, संगिनी की स्वास्थ्य महकमे में एएनएम पद पर पदोन्नती, सरकारी अस्पताल में आशा वर्कर के लिए विश्राम की व्यवस्था हो।महासंघ के राष्ट्रीय मंत्री सुरेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि जननी सुरक्षा योजना में कार्य करने वाली आशा वर्कर सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रही है। यही वजह है कि देशभर की आशा वर्कर को अधिवेशन के माध्यम से एकजुट करने का कार्य किया है। अधिवेशन में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव को केंद्र सरकार के समक्ष ले जाया जाएगा। ताकि आशा वर्कर की समस्याओं का समाधान हो सके। मौके पर प्रदेश संगठन मंत्री बृजेश बनकोटी, प्रदेश महामंत्री ललतेश विश्वकर्मा, प्रदेश कोषाध्यक्ष गंगा गुप्ता, उपाध्यक्ष आरती थापा सहित 14 प्रांतों से आई आशा वर्कर मौजूद थीं।उड़ीसा की पंकजनी राष्ट्रीय अध्यक्षअखिल भारतीय आशा कर्मचारी महासंघ के प्रथम त्रिवार्षिक अधिवेशन में रविवार को महासंघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के चुनाव संपन्न हुए। सर्वसम्मति से उड़ीसा की आशा वर्कर पंकजनी नायक को राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी की हेमलता को राष्ट्रीय महामंत्री चुना गया। चुनाव अधिकारी सुरेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी में इंदु झा (बिहार) और आरती थापा (उत्तराखंड) उपाध्यक्ष, मंत्री विजयलक्ष्मी (कर्नाटक), सुशीला (राजस्थान), कोषाध्यक्ष सुमन पटेल (मध्य प्रदेश) चुनी गईं। कार्यकारिणी सदस्य के रूप में इंद्रा जांगडे (छत्तीसगढ़), निर्मला आर पटेल (गुजरात), कमलेश कुमारी (हिमाचल प्रदेश), आशा कोल (केरल), सीमा (हरियाणा) शामिल हैं।

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