ऋषिकेश, 14 अप्रैल। परमार्थ निकेतन के दिव्य प्रांगण में दिव्य श्रीमद्भागवत कथा में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज, आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी बालकानन्द महाराज कथा में पधारे और उन्होने सभी भक्तों को एकल विद्यालय के लिये प्रेरित एवं उद्बोधित किया तथा एकल विद्यालय के लिये सहयोग करने हेतु संदेश दिया। दोनों संन्तों से स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कुम्भ पर्व पर सन्तों द्वारा लिये जाने वाले संकल्पों पर भी चर्चा की ताकि जिससे माँ गंगा एवं देश में बहने वाली हर नदी को प्रदूषण से मुक्त रखा जा सके। सबने इस दिशा में कुम्भ पर्व पर मिलकर कार्य करने का आश्वासन दिया।
 संतों ने भारत रत्न बाबा साहब डाॅ भीमराव आंबेडकर की जंयती पर उन्हें याद किया और श्रद्धासुमन अर्पित कर समता और समरसता काय सद्भाव और स्वभाव में जीने का संदेश दिया। उन्होने कहा कि अपने-अपने प्रभाव से उपर उठकर स्वभाव की ओर मुडे। प्रभाव अस्थायी है और स्वभाव स्थायी है अतः स्वभाव को बदले तो स्वतः ही सब कुछ बदल जायेंगा। स्वामी जी ने कहा कि आज का दिन सहअस्तित्व और सद्भाव में जीने का है क्योेंकि इसमें जो सरसता और मधुरता  है वह दरारे और दीवारें खड़ी करने में नहीं है। हमारे ऋषियांे ने हमें भेद-भाव से उपर उठकर विश्व बन्धुत्व और वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश दिया तथा ’’सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्’’ का मंत्र दिया। अर्थात सभी सुखी हों, सभी निरोगी बनें,  के जीवन में मंगलमय घटनायें हों, कोई भी दीन दुःखी न रहे, यही संदेश हमारे ऋषियों ने दिया। 
आज की दिव्य कथा में कथा व्यास स्वामी गोविन्द देव महाराज ने रासक्रीड़ा, कंसवध, श्रीेकृष्ण रूक्मिणी विवाह का मनोरम मंत्रमुग्ध करने वाला वर्णन किया। यह दिव्य कथा भारत लोक शिक्षा परिषद और परमार्थ निकेतन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित की जा रही है। इस भक्ति, ज्ञान और संगीत की त्रिवेणी में डुबकी लगाने हेतु सैकड़ों भक्त पधारे है। 

Post A Comment: