ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश में बेसिक्स आॅफ वोउंड केयर अर्थात घावों की देखभाल विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट आॅफ मेडिकल साइंस के डायरेक्टर प्रोफेसर वी के शुक्ला तथा पीजीआई चंडीगढ़ के चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर ए के गुप्ता के साथ सीनियर प्रोफेसर बीना रवी, मुख्य अतिथि के रुप में तथा आयोजक के रूप में मुख्य संरक्षक प्रोफेसर रविकांत निदेशक एम्स ऋषिकेश एवं प्रोफेसर सुरेखा किशोर डीन के साथ साथ देशभर से आये सर्जरी एवम नर्सिंग स्टाफ ने सहभाग किया।
अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर इस कार्यशाला का उद्घाटन किया । अपने स्वागत भाषण में बोलते हुए प्रोफेसर सोम बसु ने कहा कि भारत में घाव के मैनेजमेंट की इकलौती सोसाइटी इंडियन सोसाइटी आॅफ वुन्ड मैनेजमेंट है जिसे की विश्व परिषद से भी मान्यता प्राप्त है, किंतु अफसोस की बात है की घावों की देखभाल का यह क्षेत्र अब तक उपेक्षणीय रहा है किंतु इंडियन सोसाइटी आॅफ वुन्द मैनेजमेंट के प्रयासों से घावों की देखभाल एक स्पेशलाइज्ड कार्य के रूप में उभर कर सामने आ रहा है।
एम्स निदेशक प्रोफेसर रविकांत ने कहा की घावों की देखभाल का यह कार्य सिर्फ डाॅक्टरों तक सीमित न रहकर नर्सों तथा सपोर्टिंग स्टाफ के द्वारा भी किया जाता है इस दिशा में कई पुरानी धारणाएं बदल चुकी हैं और हमें भी पश्चिमी देशों की तरह वैज्ञानिक टेंपरामेंट के साथ ड्राई ड्रेसिंग पैटर्न को अपनाना होगा । विदेशों में घावों की देखभाल में बिस्तर अथवा फर्श पर एक बूंद भी टपकना अशोभनीय कृत्य माना जाता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस कार्यशाला से एम्स ऋषिकेश में सर्जरी के बाद भरने वाले जख्मो गुणवत्ता बढेगी तथा समय निश्चित ही कम होगा । साथ ही उन्होंने बताया की कुछ साल पहले जख्मों की देखभाल के लिए प्रयुक्त किए जा रहे हैं दवाईयां तथा रसायन में काफी बदलाव आ चुका है, अतः हमें भी इस दिशा में नवीनतम प्रणाली को अपनाना होगा ताकि मरीजों की बेहतरीन देखभाल की जा सके।
अतिथि के रुप में बोलते हुए प्रोफेसर वी के शुक्ला ने बताया की घावों की देखभाल किसी भी सर्जरी का एकीकृत भाग है किंतु इस कार्य के लिए हमें भारतीय औषधियां तथा हब्र्स को भी खोजना होगा ताकि मरीज इनका खर्च वहन कर सकें क्योंकि विदेशी कंपनियों की दवाएं तथा क्रीम काफी महंगी होती है।
प्रोफेसर बिना रवि ने मौके पर कहा की घाव की देखभाल में सबसे अहम रोल नर्सिंग स्टाफ का है क्योंकि वह मरीज के जख्मों की मरहम पट्टðी करती हैं और उसमें आ रहे परिवर्तन को और नोट करती हैं अतः बेड सोर, डायबिटिक फुट केयर या किसी घाव का अल्सर बनने से रोकने में उनकी भूमिका अहम हो जाती है ।
पी जी आई के प्रो ऐ के गुप्ता ने कहा कि वे चाहेंगे कि ष्घावों की देखभालष् की ऐसी कार्यशाला पी जी आई चंडीगढ़ में भी हो। एम्स ऋषिकेश की सर्जरी विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला के आयोजक अध्यक्ष प्रोफेसर सोमप्रकाश बसु तथा डाॅक्टर फरहान हुîóा सचिव थे। कार्यक्रम में प्रो सुरेश शर्मा, डाॅ अमित गुप्ता तथा अन्य सर्जन मौजूद थे।


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