नैनीताल I नैनीताल में पर्यटक नैनी झील के लिए ही आते हैं, मगर इस झील की चिंता न तो सिंचाई विभाग को है और न ही जिला प्रशासन को. दिन-ब-दिन झील की दशा खराब होती जा रही है. झील को लेकर जिला प्रशासन गहरी नींद में है. झील के चारों ओर गंदगी पड़ी है, तो जिम्मेदार विभाग भी इस समस्या से आंख बंद किये हुए हैं. कूड़ा-कचरा ही नहीं बल्कि प्लास्टिक की बोतलें और जूते-चप्पल भी झील की सुन्दरता पर ग्रहण लगा रहे है. पर्यटन के लिये अहम झील इस दशा के लिए स्थानीय लोग भी सिंचाई विभाग की लचर व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं.
नैनीताल का पर्यटन कारोबार इसी झील से चलता है. जिसके चलते पिछले साल से सूबे के राज्यपाल केके पाल ने इस झील की दशा सुधारने के आदेश दिये थे, मगर हालत सभी के सामने हैं. सिर्फ राज्यपाल ही नहीं बल्कि राज्य की सरकार भी नैनीताल की इस झील को अपनी प्राथमिक्ताओं में रखा और गैरसैंण सत्र के दौरान इस झील के कायाकल्प के लिये 5 करोड़ का प्रावधान झील बचाने के लिए जारी किए हैं. सरकार के इतना कुछ करने के बाद झील बेहतर होने के बजाये गंदगी के अंबार में बदहाली का दंश झेल रही है.
नैनीताल दौरे पर आए प्रकाश पंत ने झील की दुर्दशा पर कहा कि नैनीझील की दशा सुधारने के लिए सरकार ने 5 करोड़ रुपये जिला प्रशासन को दिए हैं. इसके साथ नैनीझील की पवित्रता और सीवरेज की तकनीकी समस्या को दूर करने के लिए आईआईटी रुड़की से सुझाव मांगे गए हैं. जल्द ही आईआईटी रुड़की अपनी अनुशंसा देगी जिसपर कार्य शुरू कर झील को सवांरा जाएगा.
बहरहाल नैनीताल की नैनी झील का अस्तित्व सिर्फ पर्यटन के लिये ही नहीं बल्कि इसकी धार्मिक मान्यता भी है. यही कारण भी हैं कि इस झील को त्रीऋर्षि सरोवर के रूप में भी जाना जाता है. मगर नैनीताल जिला प्रशासन की बेरुखी के कारण इस झील में न सिर्फ गंदगी समा रही है, बल्कि सरकार की योजना पर भी पलिता लग रहा है.


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