ऋषिकेश, 4 अप्रैल। फिदाए मिल्लम नगर, लहरा चैक किशनगंज में जीमयता उलमा ए बिहार में दसवीं विशाल आम सभा का आयोजन किया गया जिसमें भारत के विभिन्न प्रांतों के दो लाख से अधिक मौलाना एवं मुस्लिम भाईयों ने सहभाग किया।
 इस विशाल आम सभा को सम्बोधित करने हेतु मुख्य अतिथि एवं प्रमुख वक्ता के रूप में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता और ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।
 जमीयत उलमा ए बिहार के मंच से हिन्दू आध्यात्मिक धर्मगुरू स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज का दो लाख मुस्लिम भाईयों को सम्बोधित करना तथा उन्हंे राष्ट्रीय एकता, धर्म रक्षा, अमन, एकता, सद्भाव, स्वच्छता और समरसता हेत ु प्रेरित करना राष्ट्रीय एकता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
 इस विशाल आम सभा को सम्बोधित करने हेतु मुख्य अतिथि के रूप में अमींरूल हिन्द हजरत मौलाना कारी सैय्यद मुहम्मद उस्मान साहब मनसूरपूरी सदर जींमयत ए उलमा ए हिन्द, कायद जमींयत ए हजरत मौलाना सैय्यद महमुद असअद मदनी साहब नाजिम उमुमीं जमींयत उलमा ए हिन्द, जनाब अलहाज वाहिद हुसैन साहब चिश्ती अंगारा गद्दी नशीन आस्ताना ए आलिया व सैक्रेट्री अनजुमन खुद्दाम ख्वाजा साहब अजमेर शरीफ और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने शिरकत की।
 इस सम्मेलन का उद्देश्य मनुष्य के हृदय में प्रेम एवं मानवता के बीज डालना ताकि कौमी नारा ’हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आपस में सब भाई-भाई’ को चरितार्थ किया जा सके। साथ ही जो साम्प्रदायिक ताकतें देश भर में नफरत का जहर घोल कर हमारी एकता को कमजोर कर रही है और हमारी गंगा जमनीं तहजींब को नष्ट करना चाहती है ऐसे तत्वों के इरादों को मिट्टी में मिलाया जा सके। साथ ही हमारे मुल्क की मुल्यवान धन-सम्पत्ति, हमारा भविष्य, देश की यह युवा पीढ़ी आज नशा और शराब की दलदल में फंसती जा रही है, उन्हंे इस दलदल से निकालना इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती  महाराज ने इस विशाल जन सभा को जल संरक्षण और पौधा रोपण का संदेश दिया। साथ ही सभी विशिष्ट  अतिथियों को पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया और कहा कि जिस प्रकार पेड़ सभी को समान रूप से छाया और फल देते है उसी प्रकार हम किसी भी धर्म और मजहब के हो परन्तु सबके लिये जियें सब के लिये मरे और सब के लिये करे। हमारे लिये वतन पहले हो बाकी सब बाद में हो, यह भावना हमारी राष्ट्रीय एकता को और मजबूती प्रदान करेंगी।

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