एमबीबीएस फ़ीस वृद्धि मामले पर किरकरी पर किरकिरी होने के बावजूद त्रिवेंद्र रावत सरकार सबक सीखती नहीं दिख रही है. सोमवार को ही राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा था कि राज्य के सभी निजी मेडिकल कॉलेजों को नोटिस जारी किया जा रहा है कि उन्होंने फ़ीस किस आधार पर बढ़ाई है. लेकिन मंत्री के प्रेस कांफ्रेंस करने के 24 घंटे बाद ही नोटिस जारी किया जा सका है वह भी तीनों नहीं सिर्फ़ एक मेडिकल कॉलेज-श्री गुरुराम राय मेडिकल कॉलेज.
श्री गुरु राम राय मेडिकल कॉलेज ने पिछले हफ़्ते एमबीबीएस की फ़ीस पांच गुना तक बढ़ा दी थी. तर्क यह दिया था कि वह निजी विश्वविद्यालय है इसलिए वह अपनी फ़ीस खुद बढ़ाने के लिए स्वतंत्र हैं. कमाल की बात यह भी है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इस फ़ैसले का समर्थन करते नज़र आए. हालांकि मुख्यमंत्री ये बयान देते समय ये भूल गये कि कोई भी शिक्षण संस्थान कोई व्य़ापारिक प्रतिष्ठान नहीं होता बल्कि पंजीकरण से पहले वो इस बात का शपथपत्र देता है कि वह नो प्रोफिट नो लॉस पर काम करने का इच्छुक है.
बीते महीने की 26 तारीख यानि सोमवार को एजीआरआर मेडिकल कॉलेज में फ़ीस बढ़ाए जाने का नोटिस लगाया गया तो मंगलवार से छात्र-छात्राएं इसके विरोध में कॉलेज परिसर में धरने पर बैठ गए. लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने न सिर्फ़ उनकी पूरी तरह से अनदेखी की बल्कि रात को बिजली काट कर उन्हें दबाव में लेने की कोशिश भी की.
अगले दिन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि निवेशकों को हतोत्साहित करना ठीक नहीं है. चार-पांच सौ करोड़ रुपये लगाकर कोई मेडिकल कॉलेज खोलता है, उसे हतोत्साहित करेंगे को राज्य में निवेश नहीं आएगा. विरोध के सवाल पर मुख्यमंत्री ने यहां तक कह दिया था कि इस राज्य में विरोध करने की आदत पड़ गई है.
अगले दिन भी मुख्यमंत्री इसी रुख पर कायम रहे और चार-पांच सौ गुना फ़ीस वृद्धि का निवेश के नाम पर समर्थन किया. इस बीच इस अंधेरगर्दी की ख़बर दिल्ली तक पहुंची और नेशनल मीडिया ने भी इस ख़बर को उछाला.


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