देहरादून: उत्तराखंड में पिछले 10 सालों में 3946 ग्राम पंचायतों से 118981 लोग स्थायी रूप से गांव छोड़ दिए। इसके अलावा 6338 ग्राम पंचायतों से 383626 लोगों ने अस्थायी रूप से पलायन किया है। ये सभी गांव में स्थित घरों में आते-जाते रहते हैं, मगर अस्थायी रूप से रोजगार के लिए बाहर रहते हैं। ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग की पहली अंतरिम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है, जिसे शनिवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सार्वजनिक किया। रिपोर्ट के अनुसार 50.16 फीसद लोगों ने रोजगार के लिए पलायन किया तो 15 फीसद ने शिक्षा और आठ फीसद ने चिकित्सा सुविधा के अभाव के कारण।
पलायन के एक बड़ी समस्या के रूप में उभरने पर मौजूदा सरकार ने पिछले साल अगस्त में ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग का गठन किया। अक्टूबर में आयोग ने कार्य करना शुरू किया। इस साल जनवरी और फरवरी में राज्य की 7950 ग्राम पंचायतों के 16500 गांवों का सर्वे किया गया। इसी सर्वे के आधार पर पलायन और उसके कारणों की अंतरिम रिपोर्ट तैयार की गई, जिसे शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने जारी किया। इस मौके पर आयोग के उपाध्यक्ष डॉ.एसएस नेगी, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास मनीषा पंवार समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।
रिपोर्ट के अनुसार राज्य के गांवों से 36.2 फीसद की दर से पलायन हो रहा है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। राष्ट्रीय औसत 30.6 फीसद है। राज्य के गांवों से 50.16 फीसद लोगों ने रोजगार, 15.21 फीसद ने शिक्षा, 8.83 फीसद ने चिकित्सा सुविधा, 5.61 फीसद ने वन्यजीवों द्वारा फसल क्षति, 5.44 फीसद ने कृषि पैदावार में कमी, 3.74 फीसद ने मूलभूत सुविधाओं के अभाव और 8.48 ने अन्य कारणों के चलते पलायन किया। पलायन करने वालों में 26 से 35 आयुवर्ग के 42 फीसद, 35 वर्ष से अधिक आयु के 29 फीसद और 25 वर्ष से कम आयु वर्ग के 28 फीसद लोग शामिल हैं।
गांवों के खाली होने की दर भी पिछले सात सालों में अधिक हुई है। वर्ष 2011 के बाद 734 गांव गैर आबाद हुए हैं, जिनमें चीन व नेपाल की सीमा से सटे 14 गांव भी शामिल हैं। 2011 की जनगणना में ऐसे गांवों की संख्या 968 थी। यही नहीं, पलायन के कारण राज्य के 565 गांवों में वर्ष 2011 के बाद 50 फीसद आबादी घटी है, जिनमें अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे छह गांव भी शामिल हैं।
पलायन की इस तस्वीर के बीच सुकून ये कि 850 गांवों में पिछले 10 सालों में रिवर्स माइग्रेशन भी हुआ है। सभी जिलों में लोग वापस भी लौटे हैं। बताया गया कि रिपोर्ट के आधार पर नौ पर्वतीय जिलों के 35 विकासखंड चिह्नित किए गए हैं, जिनके विकास के लिए लघु, मध्यम व दीर्घकालीन कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
गांवों से पलायन कहां से कहां
-19.46 फीसद लोगों ने नजदीकी कस्बों में
-15.18 फीसद ने अपने जनपद मुख्यालय में
-35.69 फीसद ने राज्य के अन्य जनपदों में
-28.72 फीसद उत्तराखंड से बाहर
-0.96 ने देश से बाहर
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि पलायन के कारणों के पीछे मुख्य रूप से रोजगार, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे कारण उभरकर सामने आए हैं। ये क्षेत्र सरकार की प्राथमिकता के हैं। फिर चाहे वह शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू करना हो या फिर चिकित्सा के क्षेत्र में सालभर में 1141 डॉक्टरों की नियुक्ति। रोजगार सृजन के लिहाज से कई कदम उठाए गए हैं। सरकार स्पष्ट विजन के साथ आगे बढ़ रही है।


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