विधानसभा अध्यक्ष ने किया पुस्तक विमोचन
-संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है जिसे जीवित रखना आवश्यक है -प्रेमचंद
ऋषिकेश,15मई । श्री दर्शन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर राधा मोहन दास द्वारा रचित ग्रंथश्रीहरिनामांमृत व्याकरण वभाषा तथा डा. पुष्पा खंडूरी एसोसिएट प्रोफेसर एवं डीजवी महाविद्यालय द्वारा रचित छायावादी काव्य और वस्तु विवान का लोकार्पण विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने एक समारोह के दौरान किया । मंगलवार महाविद्यालय में पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है इसे जीवित रखना अत्यंत आवश्यक है इसी को ध्यान में रखकर उनके द्वारा सभी सरकारी विभागों में संस्कृत में नाम पट्टिकाएं लगाए जाने के आदेश उनके द्वारा दिए गए थे जिसकी सभी ने सराहना भी की थी क्योंकि उत्तराखंड ही एक ऐसा राज्य है जहां संंस्कृृृतत को पढ़ने व सीखने वालेे छात्रों की संख्या बहुतायत है इसलिए इसे प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है उन्होंने कहा कि संस्कृत भी एक ऐसी भााषा है जिससे सभी भाषाओं का जन्म हुआ है जिसे बचाया जाना आवश्यक
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रुप में प्रशांत दीक्षित बंशीधर पोखरियाल , चेतन शर्मा, भगत राम कोठारी, संजय शास्त्री, भावना पंत, राधा मोहन, देवेन्द्र दत्त सकलानी, चारु कोठारी, अनिता मंमगाई ,शिवमूर्ती कंडवाल ,विवेक खंण्डूरी, दिनेश सत्ती, योगेशवर प्रसाद ध्यानी, उषा रावत, आदि उपस्थित थे।
-संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है जिसे जीवित रखना आवश्यक है -प्रेमचंद
ऋषिकेश,15मई । श्री दर्शन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर राधा मोहन दास द्वारा रचित ग्रंथश्रीहरिनामांमृत व्याकरण वभाषा तथा डा. पुष्पा खंडूरी एसोसिएट प्रोफेसर एवं डीजवी महाविद्यालय द्वारा रचित छायावादी काव्य और वस्तु विवान का लोकार्पण विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने एक समारोह के दौरान किया । मंगलवार महाविद्यालय में पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है इसे जीवित रखना अत्यंत आवश्यक है इसी को ध्यान में रखकर उनके द्वारा सभी सरकारी विभागों में संस्कृत में नाम पट्टिकाएं लगाए जाने के आदेश उनके द्वारा दिए गए थे जिसकी सभी ने सराहना भी की थी क्योंकि उत्तराखंड ही एक ऐसा राज्य है जहां संंस्कृृृतत को पढ़ने व सीखने वालेे छात्रों की संख्या बहुतायत है इसलिए इसे प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है उन्होंने कहा कि संस्कृत भी एक ऐसी भााषा है जिससे सभी भाषाओं का जन्म हुआ है जिसे बचाया जाना आवश्यक
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रुप में प्रशांत दीक्षित बंशीधर पोखरियाल , चेतन शर्मा, भगत राम कोठारी, संजय शास्त्री, भावना पंत, राधा मोहन, देवेन्द्र दत्त सकलानी, चारु कोठारी, अनिता मंमगाई ,शिवमूर्ती कंडवाल ,विवेक खंण्डूरी, दिनेश सत्ती, योगेशवर प्रसाद ध्यानी, उषा रावत, आदि उपस्थित थे।


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