ऋषिकेश। सीमा विस्तार खारिज होने से शहरी विकास विभाग से लेकर पंचायती राज विभाग की तमाम व्यवस्थाएं उलट पुलट हो गई हैं। इस फैसले से ना सिर्फ सभी 41 निकाय अपने पुराने स्वरूप में आ गए हैं, बल्कि करीब तीन महीने पहले अधिकारिक रूप से नगर निकायों में शामिल ग्राम पंचायतें फिर से पंचायती राज विभाग के अधीन आ गई हैं। अब दोनों विभागों को नए सिरे से इस पर कागजी कार्रवाई करनी होगी।
फैसले का तत्काल असर नवगठित ऋषिकेश और कोटद्वार नगर निगम पर पड़ेगा। प्रदेश सरकार ने सीमा विस्तार के जरिए ऋषिकेश और कोटद्वार नगर पालिका को नगर निगम के रूप में उच्चीकृत किया था। ऋषिकेश में दो जबकि कोटद्वार में 73 ग्राम पंचायतों को नगर निगम में शामिल इन निकायों में आबादी के मानक को एक लाख के पार पहुंचा कर नगर निगम में उच्चीकृत किया गया। लेकिन अब सीमा विस्तार खारिज होने से दोनों निकायों में आबादी का मानक घट जाएगा। इस कारण दोनों नवगठित नगर निगम फिर से नगर पालिका वाली श्रेणी में आ गई हैं। 
शहरी विकास विभाग ने सीमा विस्तार वाले सभी 41 निकायों में कुल मिलाकर 282 ग्राम पंचायतों को शामिल किया था। इसके लिए पंचायती राज विभाग कई जगह ग्राम प्रधानों से बस्ते भी जमा करवा चुका है। लेकिन इस फैसले के बाद तकनीकी तौर पर इस ग्राम पंचायतों का वजूद फिर खड़ा हो गया है। पंचायती राज विभाग ने हालांकि इन पंचायतों को अभी विधिवत रूप से डिनोटिफाइड नहीं किया है, ऐसे में उक्त सभी ग्राम पंचायतें फिलहाल सीधे तौर पर पंचायती राज विभाग के अधीन आ गई हैं।
सीमा विस्तार वाले सभी निकायों में सरकार ने नए भूगोल के अनुसार वार्डों का पुनर्गठन किया था। कई निकायों में वार्ड की संख्या भी इस आधार पर बढ़ गई थी। वार्डों के नए परिसीमन और संख्या के आधार पर नई वोटर लिस्ट बनाई गई। मतदान केंद्रों का गठन भी किया गया। अब सीमा विस्तार खारिज होने से, निकाय पुराने परिसीमन में पहुंच गए हैं। ऐसे में यदि सरकार अब पुराने परिसीमन पर चुनाव कराती है तो वोटर लिस्ट का प्रकाशन नए से करना होगा। इसके लिए पुराने वार्ड को आधार बनाना होगा। साथ ही वार्ड का आरक्षण भी नए सिरे से करना होगा। 
निकायों में सीमा विस्तार की प्रक्रिया गतवर्ष मई-जून में ही शुरू हो गई थी। इसके बाद अक्तूबर-नवंबर तक सभी निकायों में प्रथम चरण का सीमा विस्तार पूरा हुआ। तब से इन पंचायतों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की स्थिति डांवाडोल हो चली थी। कई प्रधानों ने इस बीच अपने बस्ते भी जमा करा दिए थे। साथ ही पंचायत निधि से काम काज भी रोक दिए थे। लेकिन अब हाईकोर्ट से सीमा विस्तार खारिज होने से पंचायत प्रतिनिधियों का वजूद भी फिर खड़ा हो गया है। ऐसे में पंचायत प्रतिनिधि फिर सक्रिय हो गए हैं। 
हाईकोर्ट ने हालांकि पांच अप्रैल को जारी सीमा विस्तार अधिसूचना को निरस्त किया है। इसमें करीब 30 निकाय ही शामिल हैं। लेकिन यह फैसला सीमा विस्तार वाले सभी 41 निकायों पर शामिल होगा। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के मुताबिक चूंकि शेष निकायों में सीमा विस्तार की प्रक्रिया भी पांच अप्रैल वाली अधिसूचना की तरह जारी हुई हैं, इसलिए यह फैसला सभी 41 निकायों पर लागू होगा।  

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