-बाघ का जंगलों में संरक्षण किया जाना अति आवश्यक है  -सनातन
ऋषिकेश,  29 जुलाई। अंतर्राष्ट्रीय टाइगर दिवस के अवसर पर उत्तराखंड राज्य मे भी  बाघ संरक्षण जागरूकता दिवस आयोजित किया गया। इस अवसर पर राजाजी नेशनल पार्क के अंर्तगत रायवाला मे बाघ संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए उपस्थिति को जानकारी दी गई। रविवार को आयोजित जागरूकता दिवस के दौरान राजाजी नेशनल पार्क के निदेशक सनातन सोनकर ने कहा कि  हर साल देशभर मे 29 जुलाई को ग्लोबल टाइगर डे मनाया जाता है। जिसके अंर्तगत बाघों को किस प्रकार संरक्षित रखा जाता है इसकी जाऩकरी दी जाती है । उन्होंने कहा कि  आज जंगलों में  बाघों को  बचाया जाना अति आवश्यक हो गया है।  जिन्हें बचाने के लिए  जंगलों को भी  सुरक्षित रखने की आवश्यकता है क्योंकि जंगलों में  जानवरों की  जगह मानव का हस्तक्षेप ज्यादा बढ़ गया है। जिसके कारण बाल हिंसक होता जा रहा है।  जिनहे बचाने के लिए लोगों को जागरुक किया जाना अत्यंत आवश्यक है । यदि बाघ नहीं बचेंगे तो 1 दिन  जंगलों से बाघ का सफाया हो जाएगा ।राजाजी नेशनल पार्क के निदेशक  सनातन सोनकर ने बताया कि उत्तराखंड के राजाजी नेशनल  पार्क में 2017 की गणना के अनुसार  कुल बाघों की  संख्या 34 थी । इनसे अलग  04 शावक भी है।
उन्होंने बताया कि बाघ को संरक्षित करने के लिए 2015 में राजाजी नेशनल पार्क में रिज़र्व टाइगर पार्क की स्थापना भी की गई थी। तभी से बाघ के संरक्षण के लिए कार्य हो रहा है.और चार महीने बाद आल इंडिया मॉनिटरिंग की रिपोर्ट के द्वारा नए आंकड़ें आने  है.  उन्होंने बताया कि  भारत देश में आखिरी बाघ की संख्या   वर्ष2014 में 308 हो गई थी। बाघ की आबादी के साथ भारत का ट्रैक रिकॉर्ड उत्साहजनक रहा है। भारत में  दुनिया के 70 प्रतिशत बाघों का घर है । 2006 में 1,411 बाघ थे ,जो 2010 में 1,706 और 2014 में 2,226 हो गए थे।
इस प्रकार भारत में बाघों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है जो बाघ संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है । वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड और ग्लोबल टाइगर फोरम के अनुसार 2016 में वन्य बाघों की कुल संख्या 3,890 हो गई है। जनवरी 2014-18 में शुरू हुई नई बाघ गिनती में यह संख्या बढ़ने की उम्मीद है।जिनकी गणना होनी है।

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