ऋषिकेश। निशुल्क शिक्षण संस्थान उड़ान स्कूल मायाकुंड में आज टिहरी जनक्रांति के महानायक अमर शहीद श्रीदेव सुमन के बलिदान दिवस पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। स्कूल के निदेशक डॉ राजे नेगी ने अमर शहीद श्रीदेव सुमन के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुवे बताया कि वर्ष 1947 से पूर्व भारत में राजे-रजवाड़ों का बोलबाला था। कई जगह जनता को अंग्रेजों के साथ उन राजाओं के अत्याचार भी सहने पड़ते थे। श्रीदेव‘सुमन’ की जन्मभूमि उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में भी यही स्थिति थी। उनका जन्म 25 मई, 1916 को बमुण्ड पट्टी के जौल गांव में हुआ था। संवेदनशील हृदय होने के कारण वे ‘सुमन’ उपनाम से कविताएं लिखते थे।
अपने गांव तथा टिहरी में उन्होंने राजा के कारिंदों द्वारा जनता पर किये जाने वाले अत्याचारों को देखा। 1930 में 14 वर्ष की किशोरावस्था में उन्होंने ‘नमक सत्याग्रह’ में भाग लिया। इसके साथ ही उन्होंने साहित्य रत्न, साहित्य भूषण, प्रभाकर, विशारद जैसी परीक्षाएं भी उत्तीर्ण कीं। 1937 में उनका कविता संग्रह ‘सुमन सौरभ’ प्रकाशित हुआ। वे ‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन’ के भी सक्रिय कार्यकर्ता थे। उन्होंने गढ़ देश सेवा संघ, हिमालय सेवा संघ, हिमालय प्रांतीय देशी राज्य प्रजा परिषद, हिमालय राष्ट्रीय शिक्षा परिषद आदि संस्थाओं के स्थापना की। 1939 में सामन्ती अत्याचारों के विरुद्ध ‘टिहरी राज्य प्रजा मंडल’ की स्थापना हुई और सुमन जी इसके मंत्री बनाये गये। इसके लिए वे वर्धा में गांधी जी से भी मिले।1942 के ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में वे 15 जेल में रहे। 21 फरवरी, 1944को उन पर राजद्रोह का मुकदमा ठोक कर भारी आर्थिक दंड लगा दिया।
पर सुमन जी तो इसे अपना शासन मानते ही नहीं थे। उन्होंने अविचलित रहते हुए अपना मुकदमा स्वयं लड़ा और अर्थदंड की बजाय जेल स्वीकार की। राजनीतिक बन्दी होने के बाद भी उन पर अमानवीय अत्याचार किये गये। बार-बार कहने पर भी कोई सुनवाई न होती देख तीन मई, 1944 से उन्होंने आमरण अनशन प्रारम्भ कर दिया।
शासन ने अनशन तुड़वाने का बहुत प्रयास किया। पर वे अडिग रहे और 84 दिन बाद 25 जुलाई, 1944 को जेल में ही उन्होंने शरीर त्याग दिया। सुमन जी के बलिदान का अर्घ्य पाकर टिहरी राज्य में आंदोलन और तेज हो गया। एक अगस्त, 1949 को टिहरी राज्य का भारतीय गणराज्य में विलय हुआ। तब से प्रतिवर्ष 25 जुलाई को उनकी स्मृति में ‘सुमन दिवस’मनाया जाता है। इस अवसर पर श्रद्धासुमन अर्पित करने वालो में लोक गायक धूम सिंह रावत,उत्तम असवाल,निधि शर्मा,प्रियंका कुकरेती,प्रिया क्षेत्री,शालिनी भंडारी,शिवानी पंवार,दीपिका पन्त आशुतोष कुड़ीयाळ उपस्तिथि थे।

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