ऋषिकेश 23 जुलाई। ग्राम सभा फलदाकोट के ग्राम भेलडुंग में वर्ष 2014 में मनरेगा के अन्तर्गत किये गए विकास कार्यों में जनप्रतिनिधि द्वारा धांधली कर सरकारी धन के दुरूपयोग तथा शिकायत कर्ता को जान से मारने की शिकायत ग्राम भेलडुंग निवासी रविन्द्र कुमार जुगलान ने लोकपाल पौड़ी गढ़वाल सहित सम्बंधित अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों से की थी,किन्तु जब तीन वर्ष तक शिकायतकर्ता की शिकायत का निस्तारण नहीं किया गया तो जुगलान ने माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेते हुए सभी अधिकारियों पक्षकार बनाया।परिणाम स्वरूप माननीय उच्च न्यायालय ने याचि की शिकायत का संज्ञान लेते हुए 17-5-2018 को लोकपाल मनरेगा को आदेश जारी कर याचि की शिकायत को सुनने और निष्पक्ष जाँच कर विधि सम्मत पर्याप्त निर्णय लेते हुए याचि की शिकायत का आदेश के तीन सप्ताह के भीतर निस्तारण करने के आदेश पारित किए।
विदित हो की याचि ने जनहित याचिका में सम्बन्धित विभिन्न विभाग के दस अधिकारियों को पक्षकार बनाया था।जिनमे थाना लक्ष्मण झूला के थानाध्यक्ष सहित पुलिस उच्चधिकारियों और खण्ड विकास अधिकारी यमकेस्वर सहित मुख्य विकास अधिकारी पौड़ी गढ़वाल एवं सचिव ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार भी शामिल हैं।तथा याचि द्वारा 2 जुलाई 2018 को माननीय न्यायालय आदेश की प्रति सचिव पंचायत राज उत्तराखण्ड,आयुक्त गढ़वाल मण्डल एवं अपर आयुक्त प्रशासन गढ़वाल मण्डल को प्राप्त करायी गयी थी,किन्तु तीन सप्ताह बीत जाने के पश्चात भी अभी तक कोई जानकारी सम्बन्धित विभागों से नहीं मिली है।प्रार्थी ने आरोप लगाया कि जिन लोक पाल मनरेगा को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा शिकायत निस्तारण के आदेश दिए गए हैं उनका कार्यकाल दिसंम्बर 2017 में समाप्त हो जाने के कारण नए लोकपाल की नियुक्ति अभी तक नहीं हुई है ऐसे में नोडल अधिकारी को जाँच कर आख्या देनी है जिसमे लोकपाल मनरेगा कार्यालय पौड़ी से फोन पर प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्य विकास अधिकारी पौड़ी द्वारा जाँच उपजिला अधिकारी को सौंपी गयी है।शिकायतकर्ता रविन्द्र जुगलान का कहना है कि यदि माननीय न्यायालय के आदेशानुसार समय सीमा के भीतर जनहित याचिका पर कार्यवाही नहीं होती है तो सम्बन्धित अधिकारियों पर माननीय न्यायालय के आदेश की अवमानना का भी केस दर्ज करवाया जायेगा,साथ केंद्र सरकार से जाँच अधिकारी नियुक्त कर शिकायत के निस्तारण की माँग की जायेगी।
विदित हो की याचि ने जनहित याचिका में सम्बन्धित विभिन्न विभाग के दस अधिकारियों को पक्षकार बनाया था।जिनमे थाना लक्ष्मण झूला के थानाध्यक्ष सहित पुलिस उच्चधिकारियों और खण्ड विकास अधिकारी यमकेस्वर सहित मुख्य विकास अधिकारी पौड़ी गढ़वाल एवं सचिव ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार भी शामिल हैं।तथा याचि द्वारा 2 जुलाई 2018 को माननीय न्यायालय आदेश की प्रति सचिव पंचायत राज उत्तराखण्ड,आयुक्त गढ़वाल मण्डल एवं अपर आयुक्त प्रशासन गढ़वाल मण्डल को प्राप्त करायी गयी थी,किन्तु तीन सप्ताह बीत जाने के पश्चात भी अभी तक कोई जानकारी सम्बन्धित विभागों से नहीं मिली है।प्रार्थी ने आरोप लगाया कि जिन लोक पाल मनरेगा को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा शिकायत निस्तारण के आदेश दिए गए हैं उनका कार्यकाल दिसंम्बर 2017 में समाप्त हो जाने के कारण नए लोकपाल की नियुक्ति अभी तक नहीं हुई है ऐसे में नोडल अधिकारी को जाँच कर आख्या देनी है जिसमे लोकपाल मनरेगा कार्यालय पौड़ी से फोन पर प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्य विकास अधिकारी पौड़ी द्वारा जाँच उपजिला अधिकारी को सौंपी गयी है।शिकायतकर्ता रविन्द्र जुगलान का कहना है कि यदि माननीय न्यायालय के आदेशानुसार समय सीमा के भीतर जनहित याचिका पर कार्यवाही नहीं होती है तो सम्बन्धित अधिकारियों पर माननीय न्यायालय के आदेश की अवमानना का भी केस दर्ज करवाया जायेगा,साथ केंद्र सरकार से जाँच अधिकारी नियुक्त कर शिकायत के निस्तारण की माँग की जायेगी।

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