प्रकृति के विनाश पर हो रहे विकास को लेकर संत गोपाल ने त्रिवेणी घाट पर प्रारंभ किया आमरण अनशन
ऋषिकेश। प्रकृति के विनाश पर हो रहे विकास कार्यों के विरुद्ध संत गोपालदास 39वर्षीय चेला तपस्वी बद्रीप्रसाद महाराज ने ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर अनशन प्रारंभ कर दिया है ।गोपाल दास का कहना है कि वह सोमवार से अनशन पर बैठे हैं । जिनकी मुख्य मांग विकास रामराज्य ,देवभूमि की गोचर भूमि संतों को दिये जाने, के साथ अंतरराष्ट्रीय वाद विवाद संवाद समीक्षा समाधान मुख्य है उन्होंने कहा कि इससे पूर्व वह 24 जून को बद्रीनाथ में अनशन पर बैठे थे ।लेकिन वहां के कोतवाली प्रभारी ने 25 जून को अपनी हिरासत में लेकर हॉस्पिटल में भर्ती करवा दिया था ।जिसके बाद उन्होंने उन्हें जोशीमठ उपचार हेतु भेजा, और वहां से उन्हें एम्स ऋषिकेश भेजा गया लेकिन वह वहां से अपने आप को स्वस्थ समझते हुए भाग गए ।और सीधे ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर आकर उन्होंने अनशन प्रारंभ कर दिया है ।यहां यह भी बताते चलें कि संत गोपालदास सोनीपत हरियाणा के रहने वाले हैं जिन्होंने अपनी एक छोटी कुटिया कुनांऊ गांव में भी बनाई है ।जहां उनके समर्थक भी रहते हैं ।संत गोपाल दास का कहना है कि उन्होंने अपनी मांग को लेकर प्रधानमंत्री को भी जोशीमठ से पत्र लिखा था ।लेकिन उस पर कोई कार्रवाई ना होते देख, उन्हें ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट पर अनशन पर बैठना पड़ा ।उनके समर्थन में आचार्य मानव, आचार्य आनंद, आचार्य संदीप भी बैठे हैं संत गोपाल का कहना है कि वह इससे पूर्व गंगोत्री में भी आध्यात्मिक आराधना कर चुके हैं। जबकि स्थानीय घाट के लोगों का कहना है कि यह संत बृहस्पतिवार की दोपहर से ही बैठा है।
ऋषिकेश। प्रकृति के विनाश पर हो रहे विकास कार्यों के विरुद्ध संत गोपालदास 39वर्षीय चेला तपस्वी बद्रीप्रसाद महाराज ने ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर अनशन प्रारंभ कर दिया है ।गोपाल दास का कहना है कि वह सोमवार से अनशन पर बैठे हैं । जिनकी मुख्य मांग विकास रामराज्य ,देवभूमि की गोचर भूमि संतों को दिये जाने, के साथ अंतरराष्ट्रीय वाद विवाद संवाद समीक्षा समाधान मुख्य है उन्होंने कहा कि इससे पूर्व वह 24 जून को बद्रीनाथ में अनशन पर बैठे थे ।लेकिन वहां के कोतवाली प्रभारी ने 25 जून को अपनी हिरासत में लेकर हॉस्पिटल में भर्ती करवा दिया था ।जिसके बाद उन्होंने उन्हें जोशीमठ उपचार हेतु भेजा, और वहां से उन्हें एम्स ऋषिकेश भेजा गया लेकिन वह वहां से अपने आप को स्वस्थ समझते हुए भाग गए ।और सीधे ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर आकर उन्होंने अनशन प्रारंभ कर दिया है ।यहां यह भी बताते चलें कि संत गोपालदास सोनीपत हरियाणा के रहने वाले हैं जिन्होंने अपनी एक छोटी कुटिया कुनांऊ गांव में भी बनाई है ।जहां उनके समर्थक भी रहते हैं ।संत गोपाल दास का कहना है कि उन्होंने अपनी मांग को लेकर प्रधानमंत्री को भी जोशीमठ से पत्र लिखा था ।लेकिन उस पर कोई कार्रवाई ना होते देख, उन्हें ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट पर अनशन पर बैठना पड़ा ।उनके समर्थन में आचार्य मानव, आचार्य आनंद, आचार्य संदीप भी बैठे हैं संत गोपाल का कहना है कि वह इससे पूर्व गंगोत्री में भी आध्यात्मिक आराधना कर चुके हैं। जबकि स्थानीय घाट के लोगों का कहना है कि यह संत बृहस्पतिवार की दोपहर से ही बैठा है।


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