ऋषिकेश। अखिल भारतिय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स में रोड सुरक्षा पर जन स्वास्थ्य व्याख्यान आयोजित किया गया जिसमें एम्स संस्थान के अस्थि रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा दुपहिया तथा चारपहिया वाहन से होने वाली दुर्घटना के बारे में जानकारी दी ओर इससे सम्बंधित समाधान के बारे में बताया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ आर बी कालिया ने सभी का स्वागत करते हुए रोड सुरक्षा के बारे में सभी को जानकारी दी, तथा
अस्थि रोग विभाग के डॉ तरूण गोयल दो पहिया वाहन के बारे में बताया और कहा कि सड़क पर जो भी दुर्घटना होती हैं वो सबसे ज्यादा दुपहिया वाहन से होती है।
जिसके कही मुख्य कारण है जैसे हैलमेट न पहनना, छमता से अधिक सवारी बिठाना,तेज गति से वाहन चलना, लेन बदलते समय असावधानी बरतना,वाहन को अनियंत्रण में रखना ,ओवर टेकिंग, शराब पीकर वाहन चलना, आदि विषयों पर जोर देते हुए उनसे होने वाली दुर्घटनाओं के बारे में तथा कैसे इसकी रोकथाम की जाए के वारे में चर्चा की।
इसी सृंखला में डॉ अर बी कालिया ने अपने संबोधन में बताया कि दुर्घटना के बाद कि जो रोकथाम है वह बहुत कठीन है दुर्घटना कितनी भी बड़ी हो सकती है उसे उस समय नियंत्रण करना कठीन होता है ।
अपने संबोधन में उन्होंने रोड सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें।
तथा कहा आज से हम सब घर पर पुलिस है और घर पर सभी को रोड सुरक्षा के बारे में जानकारी देंगे।
उन्होंने सड़क दुर्घटना की मुख्य वजहो पर भी चर्चा की जैसे कि हैलमेट न पहनना, शराब पीकर वाहन चलाना, रोड सुरक्षा नियमों का पालन न करना,वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल, रेलवे क्रोसिंग पर पटरी पार करते समय असावधानी बरतना,आदि के बारे में जानकारी दी ।
अपने संबोधन के अंत में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि हमारे देश में हर साल सात लाख करोड केवल सड़क दुर्घटना में घायलो के उपचार में खर्च होते है जो कि हमारे देश के जीडीपी का तीन प्रतिशत है और इसकी मुख्य वजह सड़क दुर्घटना है ।
कार्यक्रम के अंत में अस्थि रोग विभाग की विभागध्यक्ष डॉ शोभ एस अरोड़ा ने चौपहिया वाहन से होने वाली दुर्घटना के बारे में जानकारी देते हुए उससे लगने वाली चोटों के बारे में बताया ।
उन्होंने कहा कि क्या चोपहिय वहां सुरक्षित है ? कहा कि कई बार हम कल्पना कर लेते है कि हमारे साथ कोई दुर्घटना नही होगी ।जबकि ऐसा नही है दुर्घटना कभी बता कर नही आती वह हमारी लापरवाही की वजह से होती है।उन्होंने अपने संबोध में सीट बेल्ट की अनिवार्यता पर जोर देते हुए कहा कि वाहन में पीछे बैठे व्यक्ति को उतना ही सतर्क रहना चाहिए जितना कि चालक। दुर्घटना के समय पीछे बैठे व्यक्ति को सबसे ज्यादा चोट आती है जो कि बहुत गंभीर हो सकती है ।
उन्होंने बताया कि वाहन तेज चलने से पूर्व अपने शारीर के साथ साथ अपने पैसों के बारे में भी सोचें। उन्होंने सभी को अगाह करते हुए कहा कि दुर्घटनाये कितनी खरतनाक हो सकती है इस बात का अंदाजा नही लगाया जा सकता ओर उसमे आने वाले खर्चे का भी।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सीट बेल्ट की अनिवार्यता पर जोर दिया और सभी चौपहिया वाहन में सवारी करते समय सीट बेल्ट पहनने का आग्रह किया।
उक्त कार्यक्रम में अस्थि रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ शोभा एस अरोड़ा, प्रसाशनिक अधिकारी सशिकान्त जी ,अस्थि रोग विभाग के डॉ अर बी कालिया ,डॉ तरुण गोयल आदि मौजूद थे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ आर बी कालिया ने सभी का स्वागत करते हुए रोड सुरक्षा के बारे में सभी को जानकारी दी, तथा
अस्थि रोग विभाग के डॉ तरूण गोयल दो पहिया वाहन के बारे में बताया और कहा कि सड़क पर जो भी दुर्घटना होती हैं वो सबसे ज्यादा दुपहिया वाहन से होती है।
जिसके कही मुख्य कारण है जैसे हैलमेट न पहनना, छमता से अधिक सवारी बिठाना,तेज गति से वाहन चलना, लेन बदलते समय असावधानी बरतना,वाहन को अनियंत्रण में रखना ,ओवर टेकिंग, शराब पीकर वाहन चलना, आदि विषयों पर जोर देते हुए उनसे होने वाली दुर्घटनाओं के बारे में तथा कैसे इसकी रोकथाम की जाए के वारे में चर्चा की।
इसी सृंखला में डॉ अर बी कालिया ने अपने संबोधन में बताया कि दुर्घटना के बाद कि जो रोकथाम है वह बहुत कठीन है दुर्घटना कितनी भी बड़ी हो सकती है उसे उस समय नियंत्रण करना कठीन होता है ।
अपने संबोधन में उन्होंने रोड सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें।
तथा कहा आज से हम सब घर पर पुलिस है और घर पर सभी को रोड सुरक्षा के बारे में जानकारी देंगे।
उन्होंने सड़क दुर्घटना की मुख्य वजहो पर भी चर्चा की जैसे कि हैलमेट न पहनना, शराब पीकर वाहन चलाना, रोड सुरक्षा नियमों का पालन न करना,वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल, रेलवे क्रोसिंग पर पटरी पार करते समय असावधानी बरतना,आदि के बारे में जानकारी दी ।
अपने संबोधन के अंत में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि हमारे देश में हर साल सात लाख करोड केवल सड़क दुर्घटना में घायलो के उपचार में खर्च होते है जो कि हमारे देश के जीडीपी का तीन प्रतिशत है और इसकी मुख्य वजह सड़क दुर्घटना है ।
कार्यक्रम के अंत में अस्थि रोग विभाग की विभागध्यक्ष डॉ शोभ एस अरोड़ा ने चौपहिया वाहन से होने वाली दुर्घटना के बारे में जानकारी देते हुए उससे लगने वाली चोटों के बारे में बताया ।
उन्होंने कहा कि क्या चोपहिय वहां सुरक्षित है ? कहा कि कई बार हम कल्पना कर लेते है कि हमारे साथ कोई दुर्घटना नही होगी ।जबकि ऐसा नही है दुर्घटना कभी बता कर नही आती वह हमारी लापरवाही की वजह से होती है।उन्होंने अपने संबोध में सीट बेल्ट की अनिवार्यता पर जोर देते हुए कहा कि वाहन में पीछे बैठे व्यक्ति को उतना ही सतर्क रहना चाहिए जितना कि चालक। दुर्घटना के समय पीछे बैठे व्यक्ति को सबसे ज्यादा चोट आती है जो कि बहुत गंभीर हो सकती है ।
उन्होंने बताया कि वाहन तेज चलने से पूर्व अपने शारीर के साथ साथ अपने पैसों के बारे में भी सोचें। उन्होंने सभी को अगाह करते हुए कहा कि दुर्घटनाये कितनी खरतनाक हो सकती है इस बात का अंदाजा नही लगाया जा सकता ओर उसमे आने वाले खर्चे का भी।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सीट बेल्ट की अनिवार्यता पर जोर दिया और सभी चौपहिया वाहन में सवारी करते समय सीट बेल्ट पहनने का आग्रह किया।
उक्त कार्यक्रम में अस्थि रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ शोभा एस अरोड़ा, प्रसाशनिक अधिकारी सशिकान्त जी ,अस्थि रोग विभाग के डॉ अर बी कालिया ,डॉ तरुण गोयल आदि मौजूद थे।


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