हरिद्वार: गंगा की रक्षा को लेकर 69 दिन से तप कर रहे प्रो. स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद लखवाड़ परियोजना के विरोध में उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना टिहरी बांध के समकक्ष है, जिससे पर्यावरण को खासा नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि सरकार नदियों में परियोजना शुरू करके करोड़ों लोगों की श्रद्धा और संस्कृति को नष्ट करने में लगी है। 
पत्रकारों से बातचीत में सानंद ने कहा कि उनके और अन्य पर्यावरणविदों के विरोध के चलते ही यह परियोजना लंबे समय से बंद पड़ी थी। उन्होंने कहा कि परियोजना के तहत देहरादून जिले के लोहारी गांव के पास यमुना नदी पर 204 मीटर ऊंचा कंक्रीट का बांध बनाया जाएगा। इससे नाराज सानंद का कहना है कि सरकार नदियों को ही नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति और सभ्यता को नष्ट करने पर लगी है। 
उन्होंने कहा कि सरकार को इसकी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राम और कृष्ण का गुणगान कर सत्ता में आने वाली सरकार को अब यमुना नदी से भी कोई सरोकार नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि यमुना का इतिहास भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा है, लेकिन अब परियोजना बनाकर सरकार भगवान श्रीकृष्ण का इतिहास भी समाप्त करने में तुली है। बता दें कि मंगलवार को दिल्ली में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी की उपस्थिति में छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने लखवाड़ परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।
शिवानंद ने प्रशासन पर लगाया सानंद को मारने का आरोप 
मातृसदन परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने जिला प्रशासन पर गंगा की रक्षा को लेकर तप कर रहे प्रो. सानंद को मारने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रशासन सोची समझी साजिश के तहत सानंद को मारना चाहता है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सानंद को 10 अगस्त को एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां से उन्हें 21 अगस्त को डिस्चार्ज किया गया था।

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