जल चढ़ाये और जल बचाये
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अन्तर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस (फे्रंडशिप डे) पर प्रकृति से मित्रव्त व्यवहार करने का दिया संदेश
देशी-विदेशी भाई-बहनों के साथ स्वामी चिदानन्द सरस्वती किया विश्व ग्लोब का जलाभिषेक
नफरत को नहीं बल्कि मुहब्बत को बनाये जीवन का अस्त्र-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 5 अगस्त। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अन्तर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस के अवसर पर आपस में मुहब्बत और इंसानियत का रिश्ता विकसित करने का दिया संदेश।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि यजुर्वेद में कहा गया है ’’मित्रस्याहं चक्षुषा सर्वाणि, भूतानि समीक्षे। मित्रस्य चक्षुषा समीक्षामहे। तथा हमें विश्व के सारे प्राणी मित्र दृष्टि से नित देखें, और सभी जीवों को हम भी मित्र दृष्टि से नित पेखें। अर्थात मुझे प्राणिमात्र मित्र की दृष्टि से देखें। कोई भी प्राणि मेरे से द्वेष न करे। इसी प्रकार मैं भी प्राणिमात्र को मित्र की दृष्टि से देखूँ।’’
स्वामी जी महाराज ने कहा कि मित्रता की दृष्टि से पूरे जगत को देखे। पूरा जगत हमारा मित्र है, हम एक दूसरे से जुड़े हुये है, कोई किसी का दुश्मन नहीं है। उन्होने कहा कि किससे बांधू बैर जगत में कोई नही पराया अतः सभी को मित्रता के भाव से देखे और सभी से मित्रता के साथ जुड़े।
स्वामी जी महाराज ने भोले की धरती पर आने वाले कावड़ियों को संदेश दिया कि भोले और भूमि दोनों से जुड़े। भोले बाबा को जल चढ़ायें और भूमि माता का जल बचाये। भोले से जुड़ने वाले, धरती से भी जुड़े और वृक्षारोपण के लिये आगे आये। उन्होने कहा कि जल, जंगल, जमीन, जानवर और जन से जुड़े तभी जन भी बचेगा और जल भी बचेगा। इनसे मित्रता करे तो पर्यावरण, प्राणी और पृथ्वी भी बचेगी। भोले का अभिषेक करे साथ ही भूमि का भी अभिषेक करे। लोगों के जीवन में शान्ति, समृद्धि और प्रेम को स्थापित करने का प्रयत्न करे। जिस दिन हमने मनुष्य, वृक्ष, सागर, पहाड़, नदियां और धरती से मित्रवत व्यवहार करना शुरू कर दिया तब हम अपने चारों ओर प्रदूषण भरा वातावरण नहीं बल्कि प्रेेम और सौहार्द पूर्ण वातावरण का निर्माण कर पायेगे। उन्होने कहा कि अगर हमारे भीतर किसी के प्रति नफरत का बीज अंकुरित हो रहा है तो उसे प्यार में परिवर्तित कर दे अन्यथा वह नफरत का बीज एक दिन हमारे भीतर ही नफरत का विशाल वृक्ष बन जायेगा और उसका सबसे पहले असर भी हम पर ही होता है अतः अपने भीतर प्रेम के वृक्ष का बीज अंकुरित करे और प्रेम और मित्रता के फल बांटे। नफरत से कभी किसी का नफा नहीं होता और मुहब्बत से कभी किसी का नुकसान नहीं होता इसलिये भाईचारे और मुहब्बत के पूल बनाये तथा पूरे विश्व को अपना परिवार बनाये।
मित्रता दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन में थाइलैण्ड, अमेरिका, मैक्सिको, कनाडा, इग्लैंड, यूरोप एवं विश्व में अन्य कई देशें से आये सैलानियों ने स्वामी जी महाराज के साथ विश्व ग्लोब का अभिषेक कर हम सब एक है का संदेश दिया। इस अवसर पर परमार्थ परिवार से सुश्री नन्दिनी त्रिपाठी, स्वामिनी आदित्यनन्दा सरस्वती जी, आचार्य संदीप शास्त्री, आचार्य दीपक शर्मा एवं परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार उपस्थित थेे।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अन्तर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस (फे्रंडशिप डे) पर प्रकृति से मित्रव्त व्यवहार करने का दिया संदेश
देशी-विदेशी भाई-बहनों के साथ स्वामी चिदानन्द सरस्वती किया विश्व ग्लोब का जलाभिषेक
नफरत को नहीं बल्कि मुहब्बत को बनाये जीवन का अस्त्र-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 5 अगस्त। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अन्तर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस के अवसर पर आपस में मुहब्बत और इंसानियत का रिश्ता विकसित करने का दिया संदेश।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि यजुर्वेद में कहा गया है ’’मित्रस्याहं चक्षुषा सर्वाणि, भूतानि समीक्षे। मित्रस्य चक्षुषा समीक्षामहे। तथा हमें विश्व के सारे प्राणी मित्र दृष्टि से नित देखें, और सभी जीवों को हम भी मित्र दृष्टि से नित पेखें। अर्थात मुझे प्राणिमात्र मित्र की दृष्टि से देखें। कोई भी प्राणि मेरे से द्वेष न करे। इसी प्रकार मैं भी प्राणिमात्र को मित्र की दृष्टि से देखूँ।’’
स्वामी जी महाराज ने कहा कि मित्रता की दृष्टि से पूरे जगत को देखे। पूरा जगत हमारा मित्र है, हम एक दूसरे से जुड़े हुये है, कोई किसी का दुश्मन नहीं है। उन्होने कहा कि किससे बांधू बैर जगत में कोई नही पराया अतः सभी को मित्रता के भाव से देखे और सभी से मित्रता के साथ जुड़े।
स्वामी जी महाराज ने भोले की धरती पर आने वाले कावड़ियों को संदेश दिया कि भोले और भूमि दोनों से जुड़े। भोले बाबा को जल चढ़ायें और भूमि माता का जल बचाये। भोले से जुड़ने वाले, धरती से भी जुड़े और वृक्षारोपण के लिये आगे आये। उन्होने कहा कि जल, जंगल, जमीन, जानवर और जन से जुड़े तभी जन भी बचेगा और जल भी बचेगा। इनसे मित्रता करे तो पर्यावरण, प्राणी और पृथ्वी भी बचेगी। भोले का अभिषेक करे साथ ही भूमि का भी अभिषेक करे। लोगों के जीवन में शान्ति, समृद्धि और प्रेम को स्थापित करने का प्रयत्न करे। जिस दिन हमने मनुष्य, वृक्ष, सागर, पहाड़, नदियां और धरती से मित्रवत व्यवहार करना शुरू कर दिया तब हम अपने चारों ओर प्रदूषण भरा वातावरण नहीं बल्कि प्रेेम और सौहार्द पूर्ण वातावरण का निर्माण कर पायेगे। उन्होने कहा कि अगर हमारे भीतर किसी के प्रति नफरत का बीज अंकुरित हो रहा है तो उसे प्यार में परिवर्तित कर दे अन्यथा वह नफरत का बीज एक दिन हमारे भीतर ही नफरत का विशाल वृक्ष बन जायेगा और उसका सबसे पहले असर भी हम पर ही होता है अतः अपने भीतर प्रेम के वृक्ष का बीज अंकुरित करे और प्रेम और मित्रता के फल बांटे। नफरत से कभी किसी का नफा नहीं होता और मुहब्बत से कभी किसी का नुकसान नहीं होता इसलिये भाईचारे और मुहब्बत के पूल बनाये तथा पूरे विश्व को अपना परिवार बनाये।
मित्रता दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन में थाइलैण्ड, अमेरिका, मैक्सिको, कनाडा, इग्लैंड, यूरोप एवं विश्व में अन्य कई देशें से आये सैलानियों ने स्वामी जी महाराज के साथ विश्व ग्लोब का अभिषेक कर हम सब एक है का संदेश दिया। इस अवसर पर परमार्थ परिवार से सुश्री नन्दिनी त्रिपाठी, स्वामिनी आदित्यनन्दा सरस्वती जी, आचार्य संदीप शास्त्री, आचार्य दीपक शर्मा एवं परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार उपस्थित थेे।


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