पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं संरक्षण अधिनियम पर हुई चर्चा
वन्य जीव, वृक्ष एवं प्राकृतिक संसाधन के लिये भी लागू हो जीवन का अधिकार-
स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 4 अगस्त। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और कानून मंत्री भारत सरकार श्री रविशंकर प्रसाद जी की भेंटवार्ता हुई।
 स्वामी जी महाराज ने माननीय कानून मंत्री जी से गंगा और अन्य नदियों को प्रदूषण मुक्त करने हेतु कानून बनाने, मानव अधिकारों की तरह वन्यजीव, वृक्ष एवं प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित रखने हेतु कानून बनाने की बात कही। साथ ही नदियों की सहायक नदियां, गाद और गदेरो पर नियम लागू होना चाहिये क्योंकि ये स्वच्छ रहेंगे तो गंगा व अन्य नदियां स्वच्छ रहेगी। उन्होने कहा कि ये गाद-गदेरे स्वच्छ रहेगे तो गंगा और अन्य नदियां भी स्वच्छ रहेगी और ये गाद-गदेरे अगर प्लास्टिक और गंदगी से भरे होंगे तो नदियां भी प्रदूषित होगी इसलिये प्रत्येक मनुष्य को अपने आस-पास के गाद-गदेरों को स्वच्छ रखना चाहियें।
 स्वामी जी ने कहा कि मानव और पर्यावरण एक-दूसरे से परस्पर जुड़े हुये है। मानव कल्याण और विकास का सीधा सम्बंध पर्यावरण से है। स्वच्छ पर्यावरण के बिना मानव विकास लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता। स्वस्थ वातावरण में रहना, शुद्ध वायु और स्वच्छ जल पर प्रत्येक मनुष्य का अधिकार है अतः जीवन के अधिकार के तहत प्र्रत्येक मनुष्य को प्रदूषण मुक्त वातावरण प्रदान किया जाना चाहिये।
 स्वामी जी ने कहा कि जिस प्रकार मनुष्य को जीवन का अधिकार प्राप्त है उसी प्रकार प्राकृतिक संसाधन, वृक्ष, वन्य जीव और जल को भी जीवन का अधिकार प्राप्त किया जाना चाहिये। वन, नदी, झील तथा समस्त वन्य जीवन को संरक्षण देना नितांत आवश्यक है। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिये कानूनी संरक्षण दिया जाना चाहिये। स्वामी जी ने जोर देते हुये कहा कि मानव अधिकारों की तरह पर्यावरणीय अधिकारों के लिये भी सख्त कानून बनाने की जरूरत है।
 स्वामी जी ने यह भी सुझाव दिया कि जिस प्रकार भारत में अनेक स्थलों को वैश्विक धरोहर स्थल घोषित कर सुरक्षा प्रदान की है उसी प्रकार प्रमुख नदियों, झीलों, वनों एवं पहाड़ों को भी वैश्विक प्राकृतिक स्थल घोषित कर सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिये। जल, वायु और मृदा संरक्षण कानून बनाये जाने का सुझाव भी रखा। उन्होने कहा कि इस ओर सरकारी तंत्र के अलावा आम नागरिक की जिम्मेदारी एवं सार्वजनिक जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया जाना चाहिये।
 स्वामी जी महाराज ने गंगा और अन्य नदियों के को अविरल बनाने वाले सुझावों की प्रति श्री रविशंकर प्रसाद जी को भेंट की।
 स्वामी जी महाराज द्वारा दिये सुझावों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताये हुये कानून मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद जी ने कहा कि प्राकृतिक स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण प्रदान करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है उन्होने कहा कि सतत विकास के साथ ही सम्पूर्ण मानव विकास हो सम्भव है। कानून मंत्री जी ने स्वामी जी महाराज द्वारा दिये सुझावांे को ध्यान पूर्वक सुना और उन्होने कहा कि भारत सरकार इसके लिये गंभीर है अतः इस कार्य निश्चित रूप शीघ्र ही आगे बढ़ाया जायेगा और बहुत जल्दी ही इस पर निर्णय सामने आयेगा। उन्होने कहा कि इस सत्र में किसी कारणवश नहीं हो पाया तो अगले सत्र में निश्चित रूप से आगे बढ़ाया जागेेगा और पूरा विश्वास है कि यह कार्य पूरा होगा।
 बैठक के पश्चात कानून मंत्री जी ने नमामि गंगे के महानिदेशक से भी चर्चा हुई उन्होने कहा कि इन सुझावों पर भीतरी मंथन होने के पश्चात इसे कैबिनेट को सौंपने की बात चल रही है। स्वामी जी महाराज ने कहा कि शीघ्र ही ’गंगा राइट्स एक्ट’ बनेगा और जो हमारी जीवनदायिनी नदियों को जीवन प्रदान करेगा इससे केवल गंगा ही नहीं बाकी सभी नदियां भी उससे निर्मल और अविरल रूप से प्रवाहित हो सकेगी।
 स्वामी जी महाराज ने जल संसाधन मंत्री श्री नितिन गडकरी जी और कानून मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद से श्री जीÛ डीÛ अग्रवाल (स्वामी संानद)  जो इस देश के जाने-माने प्रोफेसर रहे है जिन्होने अपना जीवन गंगा के लिये समर्पित कर दिया है। गंगा का गंगत्व, गंगा की पवित्रता, अविरलता और निर्मलता ही उनके जीवन का परम लक्ष्य है उनके स्वास्थ्य पर भी चिंता जाहिर की और कहा कि इसे देखते हुये शीघ्र ही इस ओर कदम बढ़ाये जाने चाहिये ताकि उनके स्वास्थ्य की भी रक्षा हो सके और गंगा के स्वास्थ्य की भी रक्षा हो सके। गंगा केवल राष्ट्रीय धरोहर नहीं बल्कि विश्व धरोहर है और स्वामी सांनद (प्रोफेसर जीÛ डीÛ अग्रवाल) भी हमारे देश की अमुल्य धरोहर है।
 स्वामी जी महाराज ने बताया कि हम श्री नितिन गडकरी जी और श्री रविशंकर जी से चर्चा करके इस निष्कर्ष पर पहुंचे की सरकार पूरी तरह गंभीर है और अगले सत्र तक निश्चित रूपेन यह कार्य सम्भव हो जायेगा। स्वामी जी ने दोनों माननीय मंत्री महोदयों को ’गंगा राइट्स एक्ट’ प्रतियां भेंट की। ’गंगा राइट्स एक्ट’ परमार्थ निकेतन, गंगा एक्शन परिवार और ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस ने अथक प्रयासों से तैयार किया गया है। इसे तैयार करने में विश्व स्तर के पर्यावरणविद्, शिक्षाविद्, कानूनविद्, वैज्ञानिक, जल विशेषज्ञ, कृषि विशेषज्ञ एवं अन्य पर्यावरण विशेषज्ञों से विश्द चर्चा कर बनाया गया है। स्वामी जी ने कहा कि संसद के अगले सत्र में हम सभी इस कानून का स्वागत कर सकेगे तथा जिन-जिन का इसे बनाने और लागू करने में योगदान है उनका भी स्वागत कर सकेगे।
 स्वामी जी महाराज ने परमार्थ निकेतन ऋषिकेश में माँ गंगा की दिव्य आरती में सहभाग करने हेतु आंमत्रित किया उन्होने इस आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार किया।

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