देहरादून: शांत फिजां और बेहतरीन आबोहवा की पहचान रखने वाले देहरादून में अब तमाम तरह की चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। शहरीकरण की दौड़ में हम तेजी से कदम जरूर बढ़ा रहे हैं, लेकिन उतनी ही त्वरित गति से दूसरी समस्याएं भी साथ जुड़ती चली जा रही हैं। अनियोजित विकास की दौड़ में नीति नियंता भ्रमित से नजर आ रहे हैं। बात शहर को सुव्यवस्थित करने की हो या फिर आमजन की सुरक्षा को लेकर, हर तरफ सवाल खड़े हैं और जिम्मेदारों के पास इसका न तो कोई दूरगामी हल दिखाई पड़ रहा और न दृढ़ इच्छाशक्ति ही।
हालात सुरक्षा को लेकर भी बिगड़ रहे हैं। जिस दून शहर में एक छोटे से अपराध को लेकर वातावरण में हफ्तों तक माहौल अशांत दिखाई पड़ता था, वहां अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। महिलाएं घर की देहरी से लेकर बाहर तक खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। व्यापारी बेधड़क अपना कारोबार करने से हिचकिचा रहे हैं।
'माय सिटी माय प्राइड' महाभियान के तहत शनिवार को दैनिक जागरण कार्यालय में आयोजित राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस (आरटीसी) में इस पर समाज के विभिन्न तबकों और सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़े पुलिस महकमे के आला अफसरों के बीच मंथन हुआ तो कुछ इस तरह की बातें निचोड़ के रूप में सामने आईं।
कानून के हाथ लंबे हुए हैं, काफी कुछ करना बाकी 
आरटीसी में अपर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि दून के हालात देश के तमाम शहरों से बेहतर हैं। यहां लड़कियां देर रात तक स्वछंद होकर घूम सकती हैं। पुलिस की क्षमता में इजाफा होने से अपराध पर अंकुश लगा है। हालांकि, राज्य गठन से पहले दून की जो स्थिति थी, अब हालात उतने बेहतर नहीं हैं। दूसरी तरफ भूमाफिया और साइबर क्राइम ने यहां अपनी जड़ें जरूर मजबूत की है।

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