नैनीताल। उत्तराखण्ड हाई कोर्ट ने हिमालयन युवा ग्रामीण विकास संस्थान रामनगर की जनहित याचिका में सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा व लोकपाल सिंह की खण्डपीठ में अपर मुख्य सचिव को दूसरी बार भी अदालत को गुमराह करने वाला शपथपत्र पेश किया है जिससे नाराज होकर कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव व मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक को कल शुक्रवार को तलब किया है और पूर्व में पारित आदेश का तोड़मरोड़ कर अदालत को गुमराह करने का शपथपत्र पेश किया है। 2 अगस्त को खण्डपीठ ने राज्य के मुख्य सचिव को शपथपत्र पेश कर बताने को कहा था कि कार्बेट पार्क में रिजाॅर्ट किस एक्ट के तहत चल रहे हैं, रात्रि में पर्यटको को इन गेस्ट हाउसों में रहने की अनुमति क्यों दी जा रही है, नेशनल पार्क में कितने गुज्जर परिवार रह रहे है उनको हटाने की व्यवस्था क्या है, बाघों के सरक्षण लिए नेशनल पार्को में गठित स्पेशल टाइगर फोर्स अभी तक क्यों काम नही कर रही है। कार्बेट के 6 रेंजो में कितनी गाड़ियों को चलाने की अनुमति दी जाती है। जिसके उत्तर में जिस पर 6 अगस्त को राज्य के अपर मुख्य सचिव की तरफ से शपथपत्र पेश किया गया था जिसे अदालत संतुष्ट नही थी खण्डपीठ ने दुबारा से शपथपत्र पेश करने को कहा था। आज अपर मुख्य सचिव रणबीर सिंह ने शपथपत्र पेश किया गया खण्डपीठ ने जब शपथपत्र को पढ़ा तो पाया कि जितने भी प्रश्न पूछे थे उनके गोलमोल उत्तर दिए गए। कार्बेट में 6 जोन है जिसमे प्रत्येक जोन 20 गाड़ियां चलने के आदेश दिए थे परन्तु शपथपत्र में प्रत्येक जोन सौ-सौ गाड़िया चलाने का शपथपत्र पेश किया गया। अपर मुख्य सचिव ने अपने शपथपत्र में कहा है कि वह सारा रिकाॅर्ड लेकर मालसी रेंज के फाॅरेस्ट गार्ड अंकुर शर्मा के पास गए। अंकुर शर्मा ने सारा रिकाॅर्ड की जांच की और गार्ड ने ही अपर मुख्य सचिव को सत्यापित किया। शपथपत्र के पैराओ को रिकाॅर्ड संलग्न होने की बात कही गयी परन्तु कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं था। यह हाल प्रदेश को चलाने वाले अपर मुख्य सचीव की लापरवाही है। मामले को सुनने के बाद खण्डपीठ नें अपर मुख्य सचिव रणबीर सिंह व मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा है और पूर्व में पारित आदेश का स्पष्टीकरण करने को कहा है।


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