ऋषिकेश ,04सितम्बर। उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा  न्यायालय में दायर की गई एक जनहित याचिका में ऋषिकेश धार्मिक नगरी में सरकारी भूमियों पर किए गए अवैध कब्जों को हटाए जाने के चलते उप जिलाधिकारी द्वारा ली गई संबंधित विभागों की बैठक में अतिक्रमण हटाए जाने से पूर्व नोटिस देने के बाद सुनवाई कर तत्काल अतिक्रमण हटाए जाने की कार्यवाही किए जाने के निर्देश दिए ।मंगलवार की शाम को नगर निगम के सभागार में आयोजित उप जिलाधिकारी हर गिरी द्वारा नगर  निगम, हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण, पीडब्ल्यूडी,  नेशनल हाईवे सिंचाई विभाग के अधिकारियों की बैठक में सीधा निर्देश दिया गया, कि जो हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाए जाने के निर्देश दिए हैं ।उस पर तत्काल कार्रवाई की जाए ,उप जिलाधिकारी ने यह कार्यवाही किए जाने के 2 सप्ताह के अंदर निर्देश भी दिए। इस दौरान अतिक्रमणकारियों को जो पहले ही चिन्हित किए जा चुके हैं उन्हें एक बार फिर नोटिस देकर सुनवाई किए जाने की बात भी कही गई, यह कार्रवाई बुधवार से ही प्रारंभ कर दी जाएगी। बैठक में अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया, कि हमें उच्च न्यायालय के आदेशों का अक्षर से पालन कराना है। उन्होंने कहा मास्टर प्लान के अंतर्गत आवासीय कॉलोनी में किए जा रहे कमर्शियल भवनों को तत्काल सील कर दिया जाए। क्योंकि उन्होंने रेजिडेंशल कॉलोनी का नक्शा पास करवाया है ना कि कमर्शियल? इसलिए उनकी कोई सुनवाई ना की जाए। जिलाधिकारी हरि गिरि ने कहा कि हमें नोटिस सुनवाई पर तत्काल कार्रवाई को अमल में लाना होगा। क्योंकि विभाग द्वारा जो कोर्ट को बताया गया है उसमें पहले ही अतिक्रमण कार्यों की सूची संलग्न है। जिससे कार्रवाई करने में कोई दिक्कत नहीं आने वाली है ।उनका कहना था इसके बावजूद भी जिन्होंने अतिक्रमण  किया है उन्हें सुनवाई से बाहर किया जाए। बैठक में नगर निगम के उपायुक्त उत्तम सिंह हरिद्वार विकास प्राधिकरण के पीडब्ल्यूडी राष्ट्रीय राजमार्ग व सिंचाई विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे जिन्होंने उप जिलाधिकारी को आश्वासन दिया कि वह उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में बुधवार से ही अपनी कार्यवाही को अमली जामा पहनाना प्रारंभ कर देंगे। उप जिलाधिकारी ने अधिकारियों द्वारा की जाने वाली कार्यवाही की समीक्षा हर 2 दिन बाद किए जाने के निर्देश भी दिए। ज्ञात रहे की एक आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गुप्ता द्वारा उच्च न्यायालय में 8 साल पूर्व जनहित याचिका के माध्यम से तीर्थ नगरी ऋषिकेश में विभागों की छत्रछाया में किए गए सरकारी भूमियों पर अतिक्रमण को लेकर कार्रवाई किए जाने की मांग की थी  जिसका संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने  तत्काल चिन्हित कर इस अतिक्रमण को हटाए जाने के शासन को निर्देश दिए हैं ।

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