गोपेश्वर: बदरीनाथ हाइवे पर नासूर बन चुके लामबगड़ भूस्खलन जोन के बार-बार अवरुद्ध होने से देश-दुनिया में यात्रा को लेकर नकारात्मक संदेश जा रहा है। भूस्खलन जोन के स्थायी ट्रीटमेंट को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध होने के बाद भी अब तक महज 40 फीसद कार्य ही हो पाया है। जबकि, कार्य पूरा करने के लिए अक्टूबर तक का ही समय शेष है। स्थायी ट्रीटमेंट तो छोडि़ए, एनएच लोनिवि (नेशनल हाइवे लोक निर्माण विभाग) यातायात सुचारू करने में भी नाकाम रहा है।
बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर पांडुकेश्वर से दो किमी आगे लामबगड़ में बीते चार दशक से भूस्खलन जोन सक्रिय है। कई बार तो यह भूस्खलन जोन दुर्घटना का कारण भी बन चुका है। 2013 की आपदा में यहां पर बदरीनाथ हाइवे का 500 मीटर से अधिक हिस्सा अलकनंदा नदी में समा गया था।
तब बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) ने यहां पर अस्थायी मार्ग बनाकर जैसे-तैसे आवाजाही शुरू करवाई थी। 2015 में प्रदेश सरकार ने भूस्खलन जोन सर्वे कराकर इसके स्थायी ट्रीटमेंट के लिए 95.96 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की। 2016 में ट्रीटमेंट के लिए टेंडर निकाले गए और एक जनवरी 2017 से निर्माण एजेंसी मेगा-फेरी कंपनी ने इस पर कार्य भी शुरू कर दिया। अनुबंध के अनुसार ट्रीटमेंट का कार्य 31 अक्टूबर 2018 तक पूरा होना है, लेकिन अब तक 40 फीसद कार्य ही पूर्ण हो पाया है।
दो चरणों में होना है ट्रीटमेंट
लामबगड़ भूस्खलन जोन का 320 मीटर हिस्सा ऐसा है, जहां निरंतर पहाड़ी दरक रही है। यहां दो चरणों में ट्रीटमेंट कार्य होना है। प्रथम चरण में अलकनंदा नदी के किनारे 500 मीटर लंबी और 26.4 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण किया जा रहा है।


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