ऋषिकेश। बजरंग मुनि सामाजिक शोध संस्थान के देहरादून रोड स्तिथ प्रबंध कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ के तहत आज धर्म और दर्शन विषय* पर परिचर्चा की गई।कार्यक्रम का शुभारम्भ हवन यज्ञ में सामूहिक रूप से विश्व शांति हेतु आहुति डाल कर किया गया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुवे मुख्य वक्ता मौलिक विचारक आचार्य पंकज ने कहा कि धर्म और दर्शन में गम्भीर अंतर विरोध है।धर्म हृदय स्थल पर भावना प्रधान होता है धर्म आत्म समर्पण की मांग करता है दर्शन बुद्धि तल पर होता है तर्क प्रधान होता है मानवीय चिंतन को स्वतंत्र दिशा में ले जाया जाता है। खड दर्शन के आधार पर भारत दर्शन का संबृद देश है धर्म अपनी एक विशिष्ट पहचान रखता है।आचरण को नियमित करने के लिए भारतीय धर्म प्रतिबद्ध है।धर्म और दर्शन पर विचार करते हुवे चिंतक को समन्वय की दृष्टि रखते हुवे अपना समाज के लिए विचार मंजूषा का प्रकल्प रखना ही भारतीयता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुवे डॉ मनोहर प्रसाद जोशी ने कहा कि धर्म जीवन में बहुत कुछ बताता है वैदिक धर्म अनादि है उसका अनुसरण करते हुवे हम अपनी जीवन प्रद्धति निर्वहन करते है भारतीय दर्शन उच्च चेतना के शिखर पर मनुष्य/समाज को स्थापित करता है।संस्थान से जुड़े समाज सेवी डॉ राजे नेगी के संचालन में चले कार्यक्रम में समाज सेवी कमल सिंह राणा,अनुसूया प्रसाद बिजलवान,उत्तम असवाल,यशवंत भंडारी,विनोद भट्ट,रोशन बिष्ठ,टीकाराम देवरानी,योगाचार्य सतीश तिवारी,अविनिश कुमार मिश्रा,रमाकांत पाल,तेजस्वी,धूम सिंह रावत,आर सी भट्ट, सुतिष गुप्ता,मंगल प्रसाद उपस्थित थे।
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बजरंग मुनि सामाजिक संस्थान में रविवार को धर्म और दर्शन विषय पर परिचर्चा की


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